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भेदभाव, उत्पीड़न और भेदभावपूर्ण रोजगार/सेवा प्रथाओं के विरुद्ध नीति

नीति

 

 

भेदभाव, उत्पीड़न और भेदभावपूर्ण रोज़गार/सेवा प्रथाओं के विरुद्ध नीति

पिछली बार 13 नवंबर, 2025 को संशोधित

 

किसी चिंता के बारे में सीधे नागरिक अधिकार अनुपालन टीम को रिपोर्ट करें:

यह फॉर्म इस QR कोड के साथ आपके मोबाइल डिवाइस या टैबलेट पर भी उपलब्ध है:

 

  • PADH संबंधी किसी चिंता की रिपोर्ट करने के लिए आप नीचे दिये गये फ़ोन नंबर पर भी कॉल कर सकते हैं: 585-275-2430.

अगर आप इस नंबर पर कॉल करते हैं, तो आपको अपनी चिंता के विवरण के साथ-साथ, अपने नाम की स्पैलिंग बताते हुए और संपर्क जानकारी प्रदान करते हुए ब्यौरे सहित एक वॉयस मेल छोड़ना होगा। अगर आपके संपूर्ण जानकारी प्रदान करने से पहले वॉयस मेल बंद हो जाता है, तो वापस कॉल करने, दोबारा अपना नाम और संपर्क जानकारी प्रदान करने, और अपनी चिंता का पूरा ब्यौरा देने के लिए स्वतंत्र महसूस करें।

 

I.    नीति और नीति वक्तव्य

 

यह विश्वविद्यालय कई राज्य और संघीय रोज़गार कानूनों द्वारा शासित होता है जो विभिन्न संरक्षित श्रेणियों (नीचे अनुभाग B में परिभाषित) के आधार पर भेदभाव और उत्पीड़न पर प्रतिबंध लगाते हैं।

 

यह विश्वविद्यालय कानून, विश्वविद्यालय के दृष्टिकोण और मान्यताओं, और अवसर की समानता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता से मेल खाते भेदभाव और उत्पीड़न से मुक्त कार्यस्थल और शैक्षणिक वातावरण को बनाए रखने के प्रति समर्पित है (जैसा कि नीति 100: कार्यस्थल की मान्यताएँ और नीति 102: रोज़गार में भेदभाव को प्रतिबंधित में निर्धारित किया गया है)।

A.   इस नीति का दायरा

भेदभाव, उत्पीड़न, और भेदभावपूर्ण रोज़गार/काम की प्रथाओं के विरुद्ध यह नीति (PADH) संकाय के सदस्यों, कर्मचारियों, रेजिडेंट चिकित्सक, फेलोज़, पोस्टडॉक्टोरल नियुक्तिधारकों (अपॉइंटीज), विद्यार्थी कर्मचारियों[1], और इंटर्न्स (वैतनिक या अवैतनिक) पर लागू होती है। यह नीति मरीज़ों, ठेकेदारों, विक्रेताओं और विश्वविद्यालय के किसी भी परिसर, सुविधा और/या संपत्ति (सामूहिक रूप से “कवर्ड व्यक्ति” (इस नीति के अंतर्गत शामिल व्यक्ति) के रूप में संदर्भित) में या के लिए सेवाएँ प्रदान करने वाले व्यक्ति समेत स्वयंसेवकों और सभी आगंतुकों पर भी लागू होती है।

 

यह नीति विश्वविद्यालय के स्थानों (कार्यस्थलों, शैक्षणिक सेटिंग्स, विद्यार्थी-आवास, आदि), और साथ ही विश्वविद्यालय द्वारा प्रायोजित गतिविधियों और कार्यक्रमों, चाहे वे विश्वविद्यालय परिसर में हों या नहीं, पर लागू होती है।

 

यह नीति उन आरोपों पर लागू नहीं होती है जो संरक्षित श्रेणी पर आधारित न हों, भले ही वह व्यवहार अनुचित या अनुपयुक्त हो। उदाहरण के लिए, इस नीति का उपयोग अग्रलिखित आरोपों का समाधान करने के लिए नहीं किया जाएगा: पारस्परिक संघर्ष; राजनीतिक मतभेद; व्यावसायिक चिंताएँ; ऐसी अभद्र भाषा या गाली-गलौज की रिपोर्टें, जो संरक्षित श्रेणी से संबंधित न हों; यूनियन की सदस्यता के आधार पर अनुचित व्यवहार का आरोप; या भाई-भतीजावाद के मामले। इस प्रकार की चिंताओं को विश्वविद्यालय की अन्य लागू होने वाली नीतियों के अनुसार आगे की कार्रवाई के लिए भेजा जाएगा, जिसमें कार्यस्थल की मान्यताओं संबंधी नीति (नीति 100), शिकायत प्रक्रिया (नीति 160), और सुधारात्मक अनुशासन नीति (नीति 154) शामिल हैं, लेकिन इन्हीं तक सीमित नहीं हैं। जब उचित हो, तो कुछ मामले विश्वविद्यालय लोकपाल को भेजे जा सकते हैं।

 

नीति के किसी उल्लंघन का आंकलन करने के मानक वही नहीं है जैसे कि आपराधिक दायित्व का पता लगाने के लिए आवश्यक विशिष्ट कानूनी मानक हैं। यह निर्धारण कि किसी व्यक्ति ने PADH का उल्लंघन किया है, में इस बात का कोई विश्लेषण या निष्कर्ष शामिल नहीं है कि कथित व्यवहार भी एक आपराधिक कृत्य का गठन कर सकता है या नहीं।

B.   भेदभाव-विरोधी और उत्पीड़न-विरोधी वक्तव्य

विश्वविद्यालय निम्नलिखित के आधार पर भेदभाव और उत्पीड़न को प्रतिबंधित करता है:

  • आयु
  • रंग
  • विकलांगता
  • घरेलू हिंसा से पीड़ित की स्थिति
  • नस्लीयता
  • लैंगिक पहचान या अभिव्यक्ति, जिसमें ट्रांसजेंडर और व्यापक लैंगिक पहचानें (जेंडर एक्सपैंसिव आइडेंटिटीज़) शामिल हैं[2]
  • आनुवंशिक जानकारी
  • वैवाहिक स्थिति, पारिवारिक स्थिति या किसी व्यक्ति का प्रजनन स्वास्थ्य संबंधी निर्णय लेना
  • सैन्य/भूतपूर्व सैनिक स्थिति
  • राष्ट्रीय मूल
  • वंश (बालों की शैली समेत)
  • धर्म, पंथ (धार्मिक पोशाक और चेहरे के बालों समेत)
  • यौन
  • यौन अभिविन्यास
  • नागरिकता की स्थिति
  • गिरफ्तारी या दोषसिद्धि का ऐसा रिकॉर्ड, जो किसी लंबित मामले से संबंधित न हो
  • कानून द्वारा संरक्षित कोई अन्य स्थिति

 

इन शब्दों की परिभाषा NYS मानवाधिकार प्रभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध है।

 

इस पूरी नीति में, ऊपर दी गई हर एक स्थिति को “संरक्षित श्रेणी” के रूप में संदर्भित किया जाएगा। विश्वविद्यालय संरक्षित श्रेणी के आधार पर भेदभाव या उत्पीड़न को सहन नहीं करता है, जिसे कदाचार माना जाता है जो जाँच और परिणामों के अधीन होगा।

C.   प्रतिशोध-विरोधी वक्तव्य

विश्वविद्यालय ऐसे किसी व्यक्ति के भी विरुद्ध प्रतिशोध को प्रतिबंधित करता है जो कथित भेदभाव या उत्पीड़न की शिकायत करता है या उसका विरोध करता है, जिसमें वे लोग भी शामिल हैं जो इस नीति के तहत किसी रिपोर्ट, या किसी जाँच में, या किसी संरक्षित श्रेणी के आधार पर किसी दावे को शामिल करने वाली अन्य कार्यवाही में एक पक्षकार के रूप में भाग लेते हैं या गवाही देते हैं। प्रतिशोध सहन नहीं किया जाएगा, और यह ऐसा कदाचार है जो जाँच के अधीन हो सकता, और किसी प्रकार के परामर्श, सुधारात्मक कार्रवाई या अनुशासनात्मक कार्रवाई के अधीन होगा।

D.   टाइटल IX वक्तव्य

विश्वविद्यालय, 1972 के शिक्षा संशोधन के टाइटल IX और इसे कार्यान्वित करने वाले विनियमों का अनुपालन करता है, जो विश्वविद्यालय के शैक्षिक कार्यक्रमों और गतिविधियों में यौन के आधार पर भेदभाव और यौन उत्पीड़न का, और साथ ही यौन के आधार पर भेदभाव के दावे करने या यौन के आधार पर भेदभाव या यौन उत्पीड़न के आरोपों का समाधान करने के लिए उपयोग की जाने वाली किसी भी प्रक्रिया में हिस्सा लेने पर प्रतिशोध की कार्रवाई को भी प्रतिबंधित करते हैं। टाइटल IX में पारस्परिक लाभ के बदले यौन उत्पीड़न, शत्रुतापूर्ण वातावरण के माध्यम से लैंगिक उत्पीड़न, यौन हमला, डेटिंग संबंधी हिंसा, घरेलू हिंसा, और पीछा करना शामिल हैं। टाइटल IX के लागू होने से संबंधित पूछताछ विश्वविद्यालय के टाइटल IX समन्वयक को संदर्भित की जानी चाहिए: titleix@rochester.edu; अधिक जानकारी के लिए टाइटल IX कार्यालय की वेबसाइट पर जाएँ या टाइटल IX नीति की समीक्षा यहाँकरें।

 

II.       शैक्षणिक स्वतंत्रता और बोलने की स्वतंत्रता के सिद्धांतों से संबंध

रोचेस्टर विश्वविद्यालय की सफलता ऐसे परिवेश पर निर्भर करती है जो सशक्त विचार और बौद्धिक रचनात्मकता का पोषण करे। इसके लिए ऐसे वातावरण की आवश्यकता होती है जिसमें विविध विचारों को व्यक्त किया और उन पर चर्चा की जा सके। विश्वविद्यालय एक ऐसा स्थान (सेटिंग) प्रदान करने का प्रयास करता है जो इसके समुदाय का गठन करने वाले सभी व्यक्तियों के योगदान का सम्मान करता है, जो बौद्धिक और व्यक्तिगत विकास को प्रोत्साहित करता है, और जो विचारों के मुक्त आदान-प्रदान को बढ़ावा देता है।

यह नीति कक्षा में, परिसर में या शैक्षणिक गतिविधि या राजनीतिक, कलात्मक और दृश्य कला अभिव्यक्ति से संबंधित किसी विश्वविद्यालय मंच पर भाषण, चर्चा, वाद-विवाद, और संवाद की सामग्री को बाधित करने के आशय से नहीं है। विश्वविद्यालय इस नीति को प्रशासित करने में शैक्षणिक स्वतंत्रता और कलात्मक अभिव्यक्ति की रक्षा करेगा। हालांकि, इस नीति द्वारा संरक्षित लोगों के विरुद्ध भेदभाव करने हेतु भाषण या अभिव्यक्ति का उपयोग करना या ऐसे भाषण का उपयोग करना जो इस नीति द्वारा संरक्षित लोगों के लिए शिक्षा ग्रहण करने, काम करने या परिसर में रहने का एक शत्रुतापूर्ण वातावरण निर्मित करता है, प्रतिबंधित है।

III.       परिभाषाएँ

 

निम्नलिखित परिभाषाएँ इस नीति के भीतर प्रयुक्त कुछ शब्दावलियों के मतलब की बेहतर समझ प्रदान करने के आशय से हैं:

प्रक्रिया-संबंधी शब्दावली

A.   रिपोर्ट करने वाला/वाली

कोई तीसरा पक्षकार जो किसी अन्य की ओर से रिपोर्ट प्रस्तुत करता है, जिसका मतलब है कि वह यह आरोप नहीं लगा रहा/रही है कि वह किसी संरक्षित श्रेणी के आधार पर व्यक्तिगत रूप से भेदभाव या उत्पीड़न का शिकार हुआ/हुई है। रिपोर्ट करने वाले व्यक्ति को परिणामों के बारे में नहीं बताया जाता है और हो सकता है कि नागरिक अधिकार अनुपालन टीम द्वारा उनसे तब तक अन्यथा संपर्क न किया जाए जब तक कि उनकी पहचान एक गवाह के रूप पर न हो जाए।

B.   शिकायतकर्ता

कोई व्यक्ति जो आरोप लगाता है कि उसके साथ ऐसा व्यवहार हुआ है जो इस नीति का उल्लंघन कर सकता है। शिकायतकर्ता ऐसा व्यक्ति भी हो सकता है जिसकी किसी रिपोर्ट करने वाले व्यक्ति द्वारा ऐसे व्यवहार के अधीन होने के रूप में पहचान की जाती है जो इस नीति का उल्लंघन कर सकता है। PADH प्रक्रिया में हो सकता है कि शिकायतकर्ता गुमनाम न हों, लेकिन अगर शिकायतकर्ता की पहचान करने के लिए जाँचकर्ता को पर्याप्त जानकारी प्रदान की गई है, तो रिपोर्ट करने वाले व्यक्ति को शिकायतकर्ता का नाम ज्ञात नहीं होने की वजह से प्रक्रिया नहीं रुकेगी। शिकायतकर्ता को एक पक्षकार के रूप में भी संदर्भित किया जा सकता है।

C.   प्रतिवादी

ऐसा व्यक्ति जिस पर इस नीति का उल्लंघन करने वाले आचरण का आरोप लगाया गया है। प्रतिवादी को एक पक्षकार के रूप में भी संदर्भित किया जा सकता है।

D.   गवाह

ऐसा व्यक्ति जिसके पास किसी रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों से संबंधित सीधे और व्यक्तिगत अवलोकन (फर्स्टहैंड ऑब्ज़र्वेशन), किसी पक्षकार द्वारा प्रत्यक्ष रूप से किए गए प्रकटीकरण, या सामग्रियों तक पहुँच, के आधार पर संबंधित सूचना या ज्ञान हो। गवाहों से अपेक्षा की जाती है कि वे जाँचकर्ताओं से मिलने के अनुरोध का पालन करें। गवाह अनुरोध कर सकते हैं कि वे पक्षकारों से और/या निर्धारण पैनल और अपील पैनल से अपनी पहचान गुप्त रखें।

E.    सहयोगी व्यक्ति

सहयोगी व्यक्ति को वर्तमान संकाय के सदस्य, कर्मचारी या विद्यार्थी अवश्य होना चाहिए, लेकिन साथ ही वह जाँच के अधीन प्रकरण में पक्षकार या गवाह भी नहीं हो सकता है। सहयोगी व्यक्ति किसी पक्षकार का मौन समर्थन करने के लिए मौजूद होते हैं, लेकिन वे पक्षकार की ओर से बोल या लिखकर संवाद नहीं कर सकते हैं या इंटरव्यू या जाँच के किसी भी पहलू में हस्तक्षेप नहीं कर/दखल नहीं दे सकते हैं।

F.    नागरिक अधिकार अनुपालन टीम (या CRCT)

मानव संसाधन कार्यालय में मौजूद तटस्थ, प्रशिक्षित जाँचकर्ताओं की एक टीम, जो रिपोर्ट करने वाले व्यक्तिों का मूल्यांकन करती है और अगले उपयुक्त चरणों के बारे में निर्णय लेती है, जिसमें जाँच, वैकल्पिक समाधान, मामले को बंद करना, और/या अगले चरणों के लिए मानव संसाधन या किसी अन्य उपयुक्त नीति, प्रक्रिया, कार्यालय या विभाग को संदर्भित करना शामिल है। CRCT भी, आवश्यकतानुसार, पक्षकारों या जाँच की गोपनीयता और सत्यनिष्ठा को बनाए रखने के लिए आवश्यक अंतरिम कार्यवाहियों के बारे में मानव संसाधन परिचालन निदेशकों या अन्य कार्यालयों/विभागों के साथ शामिल हो सकती है।

G.   निर्धारण पैनल (या पैनल)

तीन (3) या पाँच (5) प्रशिक्षित व्यक्तिओं का एक पैनल, जिनमें से एक अध्यक्ष होता है। प्रत्येक पैनल में विश्वविद्यालय सहभागिता एवं संवर्धन कार्यालय (OEE) से एक प्रतिनिधि और मानव संसाधन से एक

प्रतिनिधि अवश्य शामिल होना चाहिए[3]। अगर जाँच में एक या अधिक ऐसे पक्षकार शामिल हों जो संकाय के सदस्य हों, तो पैनल में कम से कम एक ऐसा संकाय सदस्य अवश्य शामिल होना चाहिए जिसकी प्रशासनिक नियुक्ति नहीं हो (“प्रशासनिक नियुक्ति” को एसोसिएट डीन या समकक्ष या उच्चतर रैंक पर किसी पद के रूप में परिभाषित किया गया है)। अगर जाँच में संकाय के सदस्य और कर्मचारी दोनों पक्षकारों के रूप में शामिल हों, तो पैनल का पाँचवाँ सदस्य कोई कर्मचारी सदस्य (स्टाफ़ मेंबर) अवश्य होना चाहिए। पाँच व्यक्तियों के किसी पैनल के लिए, अध्यक्ष के पास प्रशिक्षित संकाय सदस्यों और कर्मचारी सदस्यों के एक पूल में से दो अतिरिक्त पैनल सदस्यों का चयन करने का विवेकाधिकार है। पैनल जाँच की एक रिपोर्ट की समीक्षा करेगा और इस नीति का उल्लंघन हुआ है या नहीं, यह निर्णय लेने के लिए उसे संबंधित जाँच रिकॉर्ड तक पहुँच प्रदान की जाएगी। निर्धारण पैनल के अध्यक्ष और सदस्यों को इस नीति में वर्णन की गई प्रक्रिया और भेदभाव और उत्पीड़न, दोनों पर हर वर्ष प्रशिक्षण दिया जाएगा।

H.   निर्धारण पैनल का अध्यक्ष

निर्धारण पैनल का अध्यक्ष किसी विशिष्ट मामले के संबंध में विचार-विमर्श के सत्रों को आयोजित करता है और उसका चयन नीचे अनुभाग VIII में दिए गए चार्ट के आधार पर किया जाता है। डिफ़ॉल्ट पैनल अध्यक्ष के पास अनुभाग VIII में आगे बताए गए अनुसार, मामले को किसी नामित व्यक्ति को सौंपने का विवेकाधिकार होता है। अगर पाँच सदस्यों वाला पैनल वांछित है (या, किसी संकाय प्रतिवादी के मामले में, अपेक्षित है), तो अध्यक्ष के पास दो (2) अतिरिक्त सदस्यों को चुनने का विवेकाधिकार होता है।

I.      अपील पैनल

तीन (3) निर्णयकर्ताओं का एक पैनल, जिसमें नीचे अनुभाग IX(D) में पहचाने गए संबंधित अध्यक्ष (या नामित व्यक्ति), OEE का एक प्रतिनिधि, और मानव संसाधन का एक प्रतिनिधि शामिल होता है।  अपील पैनल, यह निर्धारित करने के लिए कि अपील स्वीकार करने का कोई आधार मौजूद है या नहीं, जाँच रिपोर्ट, निर्धारण पैनल के लिखित निर्धारण, और जाँच फ़ाइल से संबंधित ऐसी किसी भी अतिरिक्त सामग्रियों की समीक्षा करेगा जिन्हें वह आवश्यक समझे।  अपील पैनल के सदस्यों को इस नीति में वर्णन की गई प्रक्रिया और भेदभाव और उत्पीड़न, दोनों में वार्षिक रूप से प्रशिक्षण दिया जाएगा।

J.    वरिष्ठ पदाधिकारी (लीडर)

इस नीति के प्रयोजन के लिए, प्रोवोस्ट (विश्वविद्यालय के मुख्य शैक्षणिक अधिकारी), उपाध्यक्ष (वाइस प्रेसिडेंट), अधिष्ठाता (डीन), निदेशक, प्रमुख या अध्यक्ष।

K.   अपील पैनल का अध्यक्ष

अपील पैनल के अध्यक्षों का निर्धारण नीचे अनुभाग IX(D) में वर्णन किए गए अनुसार किया जाता है। अपील पैनल का अध्यक्ष किसी विशिष्ट मामले पर विचार-विमर्श के सत्रों को आयोजित करता है।

L.    कार्य दिवस

इस नीति में दी गई समय-सीमाएँ कार्य दिवसों में मापी जाती है। कार्य दिवस का मतलब है सोमवार से शुक्रवार, विश्वविद्यालय द्वारा मान्यता प्राप्त छुट्टियों को छोड़कर।

प्रतिबंधित आचरण

A.   अलग-अलग व्यवहार पर आधारित भेदभाव

भेदभाव में, कोई प्रतिकूल कार्रवाई या निर्णय, या किसी व्यक्ति या लोगों के समूह के साथ किसी संरक्षित श्रेणी की वजह से या किसी संरक्षित श्रेणी में अन्य व्यक्तियों के साथ कथित या वास्तविक संबद्धता/साहचर्य की वजह से अलग तरीके से व्यवहार करना, शामिल है। भेदभाव के स्तर तक पहुँचने के लिए, प्रतिकूल कार्रवाई, निर्णय या अलग तरीके से व्यवहार से जुड़े इरादे का प्रमाण अवश्य होना चाहिए।

 

इरादे के प्रमाण का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि कोई व्यक्ति, उसे मौखिक, लिखित, शारीरिक या इलेक्ट्रॉनिक आचरण बंद करने के लिए कहे जाने या यह सूचित किए जाने के बावजूद कि उसका आचरण उत्पीड़नकारी है और इसलिए भेदभाव के स्तर तक पहुँच सकता है, ऐसा उत्पीड़न (जैसा कि नीचे परिभाषित है) करने को निरंतर जारी रखता है।

B.   असमान (प्रतिकूल) प्रभाव के आधार पर भेदभाव

गैर-कानूनी भेदभावपूर्ण प्रथा किसी प्रथा के भेदभावपूर्ण प्रभाव से स्थापित किया जा सकता है, भले ही ऐसी प्रथा किसी भेदभावपूर्ण इरादे से प्रेरित न हो। किसी प्रथा का भेदभावपूर्ण प्रभाव तब होता है जब वह वास्तव में या पूर्वानुमेय ढंग से व्यक्तियों के किसी समूह पर, उनकी साझा संरक्षित श्रेणियों की वजह से, असमान (प्रतिकूल) प्रभाव का परिणाम देता है। अगर प्रथा को कानूनी रूप से पर्याप्त कोई न्यायोचित समर्थन मिलता है तो वह तब भी कानूनी हो सकता है। कानूनी रूप से पर्याप्त कोई न्यायोचित समर्थन तब मौजूद होता है जब चुनौती दी गई प्रथा: (1) प्रश्नगत पद के लिए नौकरी से संबंधित हो और कामकाज की आवश्यकता के सुसंगत हो; और (2) कामकाज की आवश्यकता ऐसी किसी दूसरी प्रथा से पूरी नहीं की जा सकती जिसका असर कम भेदभाव वाला हो।

असमान (प्रतिकूल) प्रभाव के दावों की प्रकृति को देखते हुए, जब नागरिक अधिकार अनुपालन कार्यालय को इस तरह का आरोप लगाने वाला कोई रिपोर्ट प्राप्त होता है, तो नागरिक अधिकार अनुपालन कार्यालय, विधिक परामर्श कार्यालय के साथ परामर्श करके, रिपोर्ट की जाँच के लिए उपयुक्त प्रक्रिया का निर्धारण करेगा, इस बात का मूल्यांकन करेगा कि भेदभाव हुआ है या नहीं, और अगर हुआ है, तो उसके प्रभावों के निवारण के लिए आवश्यक कदम उठाएगा।

C.   उत्पीड़न

उत्पीड़न भेदभाव का ही एक रूप है जिसमें ऐसा मौखिक, लिखित, शारीरिक या इलेक्ट्रॉनिक आचरण शामिल है जो:

  1. अवांछनीय हो;
  2. उस व्यक्ति के संरक्षित श्रेणी(श्रेणियों) पर आधारित हो जिसके साथ ऐसा व्यवहार किया गया है; और
  3. उस स्तर से ऊपर उठ जाता है जिसे कोई विवेकशील व्यक्ति एक मामूली तिरस्कार या तुच्छ असुविधा से अधिक मानेगा। विवेकशील व्यक्ति से अभिप्राय ऐसे व्यक्ति से है, जिसकी संरक्षित श्रेणी वही हो जो उत्पीड़न का सामना कर रहे व्यक्ति की है।

 

उत्पीड़न करने का इरादा न होना प्रतिरक्षा का आधार नहीं होगा।

 

यौन उत्पीड़न समेत उत्पीड़न, किन्हीं भी व्यक्तियों के बीच हो सकता है, भले ही उनका यौन, या लिंग या किसी संरक्षित श्रेणी में सदस्यता कोई भी हो। उत्पीड़नकर्ता कोई वरिष्ठ अधिकारी, अधीनस्थ, सहकर्मी, संकाय सदस्य या ऊपर दायरा अनुभाग में परिभाषित कवर्ड व्यक्ति की किसी भी श्रेणी का सदस्य हो सकता है।

 

कुछ मामलों में, कोई व्यक्ति जिसे अपनी संरक्षित श्रेणी के आधार पर व्यक्तिगत रूप से गैर-कानूनी उत्पीड़न का सामना नहीं करना पड़ा हो, वह संरक्षित श्रेणी के आधार पर उत्पीड़न करने वाली टिप्पणियों या आचरण को देखने या उसके संपर्क में आने के कारण उत्पीड़ित महसूस कर सकता है या शत्रुतापूर्ण कामकाजी वातावरण का अनुभव कर सकता है, जब ऐसी टिप्पणियाँ या आचरण उन लोगों के प्रति किया जाता है जिनमें उस व्यक्ति जैसी ही संरक्षित श्रेणी होती है।

 

गैर-कानूनी उत्पीड़न तब हो सकता है जब कर्मचारी दूरस्थ रूप से काम करते हैं। यह विश्वविद्यालय के कामकाज के लिए यात्रा करते समय या विश्वविद्यालय द्वारा प्रायोजित कार्यक्रमों या पार्टियों में भी हो सकता है। कर्मचारियों द्वारा किए गए कॉल्स, टेक्स्ट्स, ईमेल्स और किसी सोशल मीडिया का उपयोग किसी अन्य कर्मचारी के प्रति गैर-कानूनी कार्यस्थल उत्पीड़न का गठन कर सकता है, भले ही वे कार्यस्थल परिसर से दूर, व्यक्तिगत डिवाइसेज़ पर या गैर-कार्यकारी घंटों के दौरान किए जाते हों।

 

सामान्यतः, कार्यस्थल के बाहर सहकर्मियों और साथियों के बीच परस्पर क्रियाएँ, जिनमें स्वेच्छा से सामाजिक रूप से या अन्य गैर-कार्यकारी प्रयोजनों से काम के बाहर किसी स्थान पर इकट्ठा होना भी शामिल है, भले ही किसी काम संबंधी घटना के तुरंत बाद हो, इस नीति से कवर नहीं होती हैं। हालांकि, अगर ऐसे आचरण का कार्यस्थल से स्पष्ट रूप से व्यक्त की जा सकने वाली संबद्धता हो या उसका कार्यस्थल पर कोई उल्लिखित प्रभाव होता हो, तो ऐसे आचरण को इस नीति के अंतर्गत कवर्ड माना जा सकता है। उदाहरण के लिए, कार्यस्थल-के-बाहर किया गया आचरण भी कार्यस्थल पर प्रभाव डाल सकता है अगर इसमें शामिल व्यक्तियों का पर्यवेक्षी संबंध हो या उनके बीच अधिकार/शक्ति की असमानता मौजूद हो। अगर ऐसा कुछ आचरण कथित रूप से कार्यस्थल पर भी हुआ है, तो यह नीति लागू होगी। ऐसे व्यवहारों के उदाहरणों के लिए, जो इस नीति के उल्लंघन में उत्पीड़न हो सकते हैं, परिशिष्ट A देखें।

 

यौन उत्पीड़न

 

यौन उत्पीड़न भी प्रतिबंधित उत्पीड़न का एक रूप है। यौन उत्पीड़न में यौन, यौन अभिविन्यास, आत्म-अभिज्ञात या कथित यौन, लिंग अभिव्यक्ति, लिंग अभिज्ञान, और ट्रांसजेंडर होने की स्थिति के आधार पर उत्पीड़न शामिल है[4]। यौन उत्पीड़न यौन संपर्क, स्पर्श करने, या किसी यौन संकेतात्मक प्रकृति की अभिव्यक्तियों तक ही सीमित नहीं है; वस्तुतः, यौन उत्पीड़न में लैंगिक भूमिका संबंधी रूढ़िबद्ध धारणाओं (जेंडर-रोल स्टीरियोटाइपिंग) के आधार पर व्यवहार करना और कर्मचारियों के साथ उनके लिंग के कारण अलग तरीके से व्यवहार करना भी शामिल हो सकता है।

 

यौन उत्पीड़न में अवांछनीय यौन प्रगतियाँ या यौन अनुग्रह के लिए अनुरोध, या यौनिक या लिंग-आधारित प्रकृति के अन्य मौखिक या शारीरिक कृत्य/आचरण शामिल हो सकते हैं जब:

  1. ऐसे आचरण के प्रति समर्पण व्यक्त या अव्यक्त रूप से किसी व्यक्ति के रोज़गार या उसकी शैक्षणिक सफलता का एक नियम या शर्त बना दिया जाता है;
  2. किसी व्यक्ति द्वारा ऐसे आचरण के प्रति समर्पण या उसकी अस्वीकृति का उपयोग ऐसे व्यक्ति को प्रभावित करने वाले रोज़गार या शैक्षणिक निर्णय के आधार के रूप में किया जाता है; या
  3. ऐसे आचरण का प्रयोजन या प्रभाव किसी व्यक्ति के काम या शैक्षणिक प्रदर्शन में अनुचित रूप से हस्तक्षेप करना होता है या ऐसा आचरण भयभीत करने वाला, शत्रुतापूर्ण या अपमानजनक कार्यशील या शैक्षणिक वातावरण बनाता है।

 

यौन उत्पीड़न इस नीति का उल्लंघन तब माना जा सकता है जब वह उसी संरक्षित श्रेणी वाले किसी ऐसे विवेकशील व्यक्ति के दृष्टिकोण से, जिसने उत्पीड़न या भेदभाव का सामना किया हो, एक मामूली तिरस्कार या तुच्छ असुविधा से अधिक बढ़ जाता है। उत्पीड़न का प्रत्येक दृष्टांत इसका अनुभव करने वालों के लिए विशिष्ट होता है, और मामूली तिरस्कारों या तुच्छ असुविधाओं और उत्पीड़नकारी व्यवहार के बीच कोई एक सीमा नहीं है। ऐसा व्यवहार जहाँ किसी कर्मचारी या कवर्ड व्यक्ति के साथ लिंग, यौन अभिविन्यास, स्वयं-निर्धारित या समझा जाने वाला लिंग, लैंगिक अभिव्यक्ति, लिंग अभिज्ञान, या ट्रांसजेंडर होने की स्थिति की वजह से उस स्तर तक बदतर व्यवहार किया जाता है जो मामूली तिरस्कार या तुच्छ असुविधा से कहीं अधिक गंभीर होता है।[5]

 

कुछ मामलों में, यौन उत्पीड़न के आरोप संभावित टाइटल IX के उल्लंघन के स्तर तक बढ़ सकते हैं। उस स्थिति में, नागरिक अधिकार अनुपालन टीम मामले को टाइटल IX कार्यालय को संदर्भित करेगी, और टाइटल IX नीति में समझाई गई शिकायत प्रक्रिया लागू होगी।

यौन हमला

 

यौन हमला, यौन उत्पीड़न का ही एक रूप है जो इस नीति, टाइटल IX, और लागू होने वाले संघीय और राज्य के कानून द्वारा प्रतिबंधित है।  यौन हमले में बलात्कार, अनुचित यौन स्पर्श (फॉंडलिंग), रक्त संबंधियों के बीच यौन संबंध (इनसेस्ट), और वैधानिक बलात्कार शामिल हैं। विश्वविद्यालय को टाइटल IX शिकायत प्रक्रिया के माध्यम से यौन हमले के आरोपों को सुलझाने की आवश्यकता है। ऐसे व्यवहार के उदाहरणों के लिए, जिसे यौन उत्पीड़न माना जा सकता है जो कि यौन हमला नहीं है, परिशिष्ट B देखें।

 

D.   प्रतिशोध

प्रतिशोध विश्वविद्यालय या विश्वविद्यालय समुदाय के किसी सदस्य द्वारा की गई ऐसी कार्रवाई है जो किसी विवेकशील व्यक्ति (किसी कर्मचारी या विश्वविद्यालय समुदाय के अन्य सदस्य) को किसी संरक्षित गतिविधि में संलग्न होने से रोकती है।

 

कोई कार्रवाई प्रतिशोधात्मक होती है अगर यह इस वजह से की जाती है क्योंकि व्यक्ति संरक्षित गतिविधि में संलग्न हुआ है। संरक्षित गतिविधि में निम्नलिखित शामिल हो सकती हैं, लेकिन यह इन्हीं तक सीमित नहीं हैं:

 

  1. किसी संरक्षित श्रेणी की वजह से कथित भेदभाव या उत्पीड़न की व्यक्तिगत रूप से शिकायत करना या उसका विरोध करना;
  2. किसी संरक्षित श्रेणी के आधार पर भेदभाव या उत्पीड़न के दावे को शामिल करने वाली किसी जाँच, कार्रवाई, सुनवाई या कानूनी कार्रवाई में गवाही देना, सहायता करना या भागीदारी करना; या
  3. किसी ऐसे संबंधित कानून के तहत अधिकारों का प्रयोग करना जो संरक्षित श्रेणी को संलिप्त करता हो।

ऐसे व्यवहार के उदाहरणों के लिए, जिसे इस नीति के उल्लंघन में प्रतिशोध की कार्रवाई माना जा सकता है, परिशिष्ट C देखें।

 

IV.    रिपोर्ट करना

विश्वविद्यालय, विश्वविद्यालय समुदाय के सदस्यों को भेदभाव, उत्पीड़न, और/या प्रतिशोधात्मक कार्रवाई की घटना की रिपोर्ट करने के लिए दृढ़ता से प्रोत्साहित करती है। इसमें विश्वविद्यालय समुदाय के सदस्य जिन्हें महसूस होता है कि उन्होंने ऐसे व्यवहार का अनुभव किया है जो इस नीति का उल्लंघन करता है, जो ऐसे आचरण के साक्षी हैं (एक दर्शक के रूप में) या ऐसे आचरण के बारे में अवगत हो जाते हैं जिसे वे मानते हैं कि इस नीति का उल्लंघन कर सकता है, शामिल हैं ।

A.   रिपोर्ट करने के विकल्प

ऐसे व्यवहार, जो इस नीति का उल्लंघन कर सकते हैं, की रिपोर्ट करने के कई विकल्प हैं:

  • सीधे नागरिक अधिकार अनुपालन टीम को, जैसा कि इस नीति के पहले पृष्ठ पर समझाया गया है;
  • व्यक्ति के विभागाध्यक्ष, अधिष्ठाता (डीन), निदेशक, प्रबंधक या प्रत्यक्ष पर्यवेक्षक (सुपरवाइज़र) को मौखिक या लिखित रूप से;
  • कोई HBRP या मानव संसाधन कार्यालय; या
  • विधिक परामर्श कार्यालय

 

जहाँ तक संभव हो, विश्वविद्यालय, सर्वोत्तम प्रथा के सुसंगत, इस बात का प्रयास करेगा कि किसी व्यक्ति को उसके रिपोर्ट या किसी रिपोर्ट पर उसके प्रत्युत्तर के आधार पर न्यूनतम बार स्पष्टीकरण देने की आवश्यकता पड़े। रिपोर्ट प्राप्त करने वाले व्यक्तियों को उस चिंता के बारे में गहन प्रश्न नहीं पूछने चाहिए, बल्कि उन्हें उस चिंता और उससे संबंधित संरक्षित श्रेणी के बारे में इतनी जानकारी इकट्ठी करनी चाहिए जो नागरिक अधिकार अनुपालन टीम को रिपोर्ट प्रेषित करने के लिए पर्याप्त हो।

 

जो व्यक्ति इस नीति के तहत रिपोर्ट करने के अपने दायित्वों के बारे में अनिश्चित हैं, उन्हें विश्वविद्यालय की मान्यताओं के अनुरूप रिपोर्ट करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है और अगर वे इस नीति के तहत अनिवार्य रिपोर्ट करने वाले व्यक्ति हो सकते हैं तो उन्हें CRCT से संपर्क करना चाहिए।

 

जब कोई कर्मचारी किसी अलग नीति या प्रक्रिया के जरिए PADH-के दायरे में आने वाले आरोपों की रिपोर्ट करता है, तो उस रिपोर्ट को आगे की उचित कार्रवाई की मूल्यांकन के लिए नागरिक अधिकार अनुपालन टीम को संदर्भित किया जाना चाहिए।

 

रिपोर्ट करने के बारे में कोई भी प्रश्न नागरिक अधिकार अनुपालन टीम को PADH@Rochester.edu पर भेजे जा सकते हैं

B.   प्रबंधकों, पर्यवेक्षकों और HRBPs द्वारा अनिवार्य रिपोर्ट किया जाना

प्रबंधन और पर्यवेक्षी कर्मचारियों और मानव संसाधन कारोबार भागीदारों को नागरिक अधिकार अनुपालन टीम को रिपोर्ट करना आवश्यक है, जब वे (1) ऐसे भेदभाव, उत्पीड़न या प्रतिशोध को देखते हैं जो इस नीति के दायरे में आ सकते हैं, या (2) ऐसे भेदभाव, उत्पीड़न या प्रतिशोध के रिपोर्ट या चिंताएँ प्राप्त करें या जानें जो इस नीति के अंतर्गत आ सकती हैं।

 

प्रबंधन और पर्यवेक्षी कर्मचारियों में शामिल हैं:

  • विद्यार्थी कर्मचारियों और संकाय सदस्यों समेत कर्मचारियों पर पर्यवेक्षी उत्तरदायित्व रखने वाला कोई भी कर्मचारी;
  • समस्त संकाय;
  • सहभागिता एवं संवर्धन अधिकारी;
  • किसी अनुदान या अनुबंध पर प्रमुख जाँचकर्ता;
  • ऐसे व्यक्ति जिन्हें क्लेरी अधिनियम (Clery Act) के अनुसरण में कैम्पस सुरक्षा प्राधिकारी के रूप में पदनामित किया गया है;
  • उप टाइटल IX समन्वयक; और
  • वे व्यक्ति जो निम्नलिखित में से किसी भी विभाग/कार्यालय में काम करते हैं:
  • सार्वजनिक सुरक्षा विभाग
  • विद्यार्थी जीवन
  • आवासीय जीवन विभाग

 

रिपोर्ट करने के इस दायित्व के अनुपालन में नागरिक अधिकार अनुपालन टीम को चिंता की तुरंत रिपोर्ट करना, समस्त ज्ञात जानकारी प्रदान करना—जिसमें शामिल लोगों के नाम भी शामिल हैं—और सहयोग करना और अगली उचित कार्रवाई का एक विश्लेषण करने हेतु अनुरोध की गई जानकारी प्रदान करना शामिल है। आम तौर से “तत्काल” से आशय ऐसा आचरण, जो इस नीति का उल्लंघन कर सकता है, ज्ञात होने या देखने के अड़तालीस (48) घंटों के भीतर है। प्रबंधन और पर्यवेक्षी कर्मचारी जिन्हें PADH की संभावित चिंता के बारे में अवगत करा दिया जाता है, उन्हें नागरिक अधिकार अनुपालन टीम को किसी रिपोर्ट प्रस्तुति के संबंध में, के सिवाय जानकारी को प्रकट नहीं करना चाहिए।

 

रिपोर्ट न करना ऐसे व्यवहार को बढ़ावा देता है और उसे जारी रहने की अनुमति देता है, जिसे विश्वविद्यालय समुदाय का कोई सदस्य भेदभावपूर्ण, उत्पीड़नकारी या प्रतिशोधात्मक मानता है। तदनुसार, रिपोर्ट न करने की जाँच हो सकती है और, कम से कम, जो अनिवार्य रिपोर्ट करने वाले व्यक्ति तत्काल रिपोर्ट करने में विफल रहते हैं, उन्हें रिपोर्ट करने के इस अनुपालन के लिए सुधारात्मक कार्रवाई के अधीन होने की अपेक्षा करनी चाहिए।

C.   गोपनीय कर्मचारी

जब तक प्रकटीकरण की आवश्यकता वाली कोई अपवादात्मक परिस्थिति लागू न हो, तब तक विश्वविद्यालय के कर्मचारी को उसकी विशेषाधिकार-प्राप्त व्यावसायिक क्षमता (मानसिक स्वास्थ्य परामर्शदाता, सामाजिक कार्यकर्ता, चिकित्सक, पादरी, स्वास्थ्य सेवा प्रदाता, और बलात्कार-संकट परामर्शदाता) के निर्वहन के दौरान प्रकट की गई जानकारियाँ, उस कर्मचारी के व्यावसायिक गोपनीयता संबंधी दायित्वों के अधीन रहती है। दूसरे शब्दों में, अपनी व्यावसायिक क्षमता में काम करते समय, गोपनीय कर्मचारियों को इस नीति के तहत हो सकता है कि रिपोर्ट करने की आवश्यकता न हो, भले ही वे पर्यवेक्षक भी हों।

 

विश्वविद्यालय के संकाय सदस्य, कर्मचारी और विद्यार्थी लोकपाल से भी परामर्श कर सकते हैं, कानून द्वारा अनुमत अधिकतम सीमा तक गोपनीय रहेंगे।

D.   रिपोर्ट करने की समय-सीमाएँ

रिपोर्ट को कथित भेदभाव, उत्पीड़न या प्रतिशोध की कार्रवाई के तीन (3) वर्ष के भीतर अवश्य प्रस्तुत किया जाना ज़रूरी है। जब कोई रिपोर्ट निर्धारित समय के भीतर प्रस्तुत की जाती है, तो विश्वविद्यालय भेदभावपूर्ण, उत्पीड़नकारी या प्रतिशोधात्मक व्यवहार के कथित पैटर्न की जाँच करेगा, और उन कृत्यों की भी जाँच कर सकता है जो सबसे हाल के भेदभावपूर्ण, उत्पीड़नकारी या प्रतिशोधात्मक कृत्य से कथित रूप से तीन (3) वर्ष से अधिक पहले घटित हुए थे।

V.    PADH जाँच लंबित रहने के दौरान एक नियोक्ता के रूप में विश्वविद्यालय के अधिकार

जब किसी रिपोर्ट में, जिसमें संरक्षित श्रेणी संबंधी भेदभाव या उत्पीड़न का आरोप लगाया गया हो, किसी अन्य विश्वविद्यालय की नीति या नीतियों के संभावित उल्लंघन का भी दोष लगाया जाता है, तो विश्वविद्यालय के पास नीति के अन्य उल्लंघनों का अलग से मूल्यांकन करने और उन पर कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित होता है—जिसमें अलग जाँच या अधिक तेज़ सुधारात्मक कार्रवाई भी शामिल है—भले ही PADH चिंताओं से संबंधित लंबित जाँच आगे बढ़ रही हो। कुछ परिस्थितियों में, अन्य विश्वविद्यालय की नीतियों के आधार पर सुधारात्मक कार्रवाई PADH जाँच को आगे न बढ़ाने का परिणाम दे सकती है।

 

किसी लंबित PADH जाँच में शामिल पक्षकारों और अन्य लोगों के संबंध में, विश्वविद्यालय को, किसी जाँच के लंबित होने की वजह से, रोज़गार की स्थिति के बारे में कोई अन्य कार्रवाई करने से रोका नहीं जाता है अगर और जैसा कि फैकल्टी हैंडबुक, संबंधित मानव संसाधन नीतियों, और/या कानून या बाहरी एजेंसियों द्वारा लागू होने वाले दायित्वों में बताया गया हो या अपेक्षित हो।

 

PADH जाँच के दौरान की गई रोज़गार-संबंधी कार्रवाइयों से प्रतिशोध का कोई अनुमान नहीं लगाया जाता है; हालांकि, प्रतिशोध के आरोपों की समीक्षा की जाएगी, और अगर उपयुक्त पाया गया, तो उनका समाधान किया जाएगा।

VI.  आरंभिक आंकलन

 

रिपोर्ट प्राप्त होने पर, नागरिक अधिकार अनुपालन टीम अगला उपयुक्त कदम निर्धारित करने के लिए आरंभिक आंकलन करेगी। सामान्यतः, किसी रिपोर्ट का समाधान करने के तीन तरीके होते हैं।

A.   मानव संसाधन या प्रबंधक/पदाधिकारी (लीडर) द्वारा अलग नीति के अनुसरण में कार्रवाई के लिए संदर्भित किया जाना (रेफ़रल)

किसी रिपोर्ट को कार्रवाई के लिए मानव संसाधन या संबंधित प्रबंधक, पर्यवेक्षक या पदाधिकारी (लीडर) द्वारा तब संदर्भित किया जाएगा जब रिपोर्ट में:

  • किसी संरक्षित श्रेणी या उससे संबंधित प्रतिशोध का आरोप न लगाया गया हो;
  • ऐसी चिंताएँ या जानकारियाँ शामिल न हों जिन्हें किसी संरक्षित श्रेणी या उससे संबंधित प्रतिशोध के आधार पर उत्पीड़न या भेदभाव से जोड़ा जा सकता हो, बल्कि इसके बजाय यह किसी संरक्षित श्रेणी से जुड़े अनुमानित संबंध पर आधारित हो;
  • रिपोर्ट गलत या गैर-पेशेवराना व्यवहार, परस्पर विवाद, आदि की प्रकृति का हो जैसा हो; और/या
  • रिपोर्ट कार्यस्थल की अन्य नीतियों के उल्लंघन में हो सकता हो।

जिन मामलों को इस आधार पर संदर्भित किया गया है कि वे इस नीति के अंतर्गत नहीं आते हैं, उनका समाधान अन्य लागू होने वाली नीतियों और प्रक्रियाओं के अनुसार किया जा सकता है, जिनमें जाँच भी शामिल हो सकती है। इस तरह का संदर्भित किया जाना (रेफ़रल), वस्तुतः, PADH रिपोर्ट और प्रक्रिया को बंद करना है, जैसा कि आगे अनुभाग VII में आगे वर्णन किया गया है।

B.   वैकल्पिक समाधान के लिए संदर्भित किया जाना (रेफ़रल)

जब रिपोर्ट में ऐसे आचरण का आरोप लगाया जाता है जिससे PADH का उल्लंघन हो सकता है लेकिन नागरिक अधिकार अनुपालन टीम यह निष्कर्ष निकाल चुकी है कि पूरी जाँच किए बिना चिंता का प्रभावी और दक्षता से निपटान किया जा सकता है, तो टीम मामले को वैकल्पिक समाधान हेतु संदर्भित करने के लिए वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं प्रमुख मानव संसाधन अधिकारी (या पदनामित) या सहभागिता एवं संवर्धन उपाध्यक्ष (या पदनामित) से अनुमोदन माँगेगी। अनुमोदन तब भी माँगा जाएगा जब शामिल पक्षकार वैकल्पिक समाधान के लिए सहमत होंगे।

 

उदाहरण के लिए, अगर एक ही प्रतिवादी के विरुद्ध समान प्रकार के रिपोर्टों का पैटर्न अनुपस्थित है, तो किसी संरक्षित श्रेणी पर आधारित या उससे जुड़ी एकमात्र टिप्पणी के बारे में आरोप लगाने वाले रिपोर्ट को किसी वैकल्पिक समाधान के लिए संदर्भित किए जाने की सर्वाधिक संभावना होगी।

 

कर्मचारियों के लिए, वैकल्पिक समाधान, आमतौर पर HR वैकल्पिक समाधान सहायक निदेशक, या उपयुक्त HRBP या प्रबंधक/पर्यवेक्षक/पदाधिकारी द्वारा संभाले जाते हैं। संकाय सदस्यों के लिए, वैकल्पिक समाधान, संकाय व्यावसायिकता समिति, संकाय व्यावसायिकता शैक्षिक समिति, डीन या अन्य उपयुक्त प्रशासनिक कर्मियों द्वारा सँभाले जा सकते हैं।

 

वैकल्पिक समाधान के तरीके का निर्धारण ऊपर बताए गए उपयुक्त कर्मचारी, प्रबंधक या पदाधिकारी द्वारा प्रत्येक केस की विशिष्ट परिस्थितियों के आधार पर किया जाएगा, जिनमें आरोप, पक्षकारगण, और ऐसे अन्य कारक शामिल हैं जो स्थिति को संभालते समय प्रकट हो सकते हैं। वैकल्पिक समाधान के संभावित तरीकों के उदाहरणों में कोचिंग, शिक्षा, मध्यस्थता, पुनर्स्थापनात्मक प्रथा या अनुशासनात्मक कार्रवाई शामिल हैं। अनुरोध किए जाने पर विश्वविद्यालय संवर्धन एवं सहभागिता कार्यालय वैकल्पिक समाधानों के लिए सहायता प्रदान कर सकता है।

 

पूरी PADH प्रक्रिया के दौरान एक विकल्प के रूप किसी रिपोर्ट का वैकल्पिक तरीके से समाधान करने पर विचार किया जाएगा।

C.   जाँच

जब किसी मामले को जाँच के लिए सही माना जाता है, तो नागरिक अधिकार अनुपालन टीम नीचे वर्णन किए गए तरीके से एक विस्तृत और निष्पक्ष जाँच करेगी।

 

यह संभव है कि, कुछ जाँच किए जाने के पश्चात, CRCT यह निर्धारित करे कि उक्त मामला वैकल्पिक समाधान या आगे अन्य उपयुक्त कार्रवाई के लिए उपयुक्त है, जिसमें विश्वविद्यालय की किसी अलग नीति के अनुसरण में की जाने वाली कार्रवाई भी शामिल है। उस स्थिति में, उपयुक्त अनुमोदन प्राप्त किया जाएगा, और पक्षकारों को अधिसूचित किया जाएगा कि मामले को संदर्भित कर दिया गया है, या PADH रिपोर्ट को आगे बिना किसी कार्रवाई के बंद किया जा सकता है (जिस पर नीचे और चर्चा की गई है)।

VII.     जाँच प्रक्रिया

 

जाँच में आम तौर पर संबंधित दस्तावेज़ों (ईमेल, टेक्स्ट मैसेज, कैलेंडर, फ़ोटो, वीडियो, आदि) इकट्ठा करने के साथ-साथ, पक्षकारों और पक्षकारों एवं जाँचकर्ता द्वारा पहचान किए गए गवाहों के साथ इंटरव्यू शामिल होते हैं। पक्षकारों और गवाहों से अपेक्षा की जाती है कि विश्वविद्यालय की मान्यताओं और नीतियों के अनुसार सच्ची जानकारी प्रदान करें।

 

इस नीति में वर्णन किए गए कदमों के साथ आगे बढ़ाने के लिए, रिपोर्ट करने वाले व्यक्ति या शिकायतकर्ता द्वारा प्रतिवादी की पहचान अवश्य की जानी चाहिए, या जाँचकर्ता को इतनी जानकारी प्रदान अवश्य की गई होनी चाहिए जो प्रतिवादी की पहचान करने हेतु कदम उठाने के लिए पर्याप्त हो।

A.   जाँचकर्ता द्वारा शिकायतकर्ता(ओं) से संपर्क/इंटरव्यू

जाँच की शुरुआत जाँचकर्ता द्वारा शिकायतकर्ता(ओं) से, उनके अनुभव और चिंताओं के बारे में जानने के लिए मीटिंग निर्धारित करने के लिए संपर्क करके होती है। शिकायतकर्ताओं से अपेक्षा की जाती है कि वे जाँचकर्ता के संपर्क करने पर तत्काल जवाब दें, जिसमें आरंभिक संपर्क के बाद दस (10) कार्य दिवसों के भीतर स्वयं को इंटरव्यू के लिए उपलब्ध कराना भी शामिल है। जब शिकायतकर्ता जाँचकर्ता को ऐसी अपरिहार्य परिस्थितियों के बारे में जानकारी प्रदान करता है[6] जिनकी वजह से वह दस (10) दिनों के भीतर मिलने में असमर्थ है, तो जाँचकर्ता के विवेकाधिकार पर इस समय-सीमा का विस्तार किया जा सकता है।

शिकायतकर्ता के साथ मीटिंग करने के पश्चात, जाँचकर्ता, सटीकता और पूर्णता सुनिश्चित करने के लिए शिकायतकर्ता के साथ आरोपों का एक प्रारूप (ड्राफ़्ट) तैयार करेगा और आरोपों का एक सारांश उसके साथ शेयर करेगा।

 

जब शिकायतकर्ता जाँचकर्ता द्वारा मीटिंग के लिए किए गए अनुरोध का उत्तर नहीं देता है, (अपरिहार्य परिस्थितियाँ को छोड़कर) दस (10) दिनों की अवधि के भीतर मीटिंग करने के लिए सहमत नहीं होता है, और/या जाँचकर्ता द्वारा शेयर किए गए आरोपों का समय-सीमा के भीतर जवाब नहीं देता है, तो:

  • अगर रिपोर्ट में प्रतिवादी को आरोपों के बारे में सार्थक नोटिस देने के लिए पर्याप्त जानकारी शामिल है, तो जाँचकर्ता प्रतिवादी को मीटिंग का अनुरोध भेजेगा; या
  • अगर रिपोर्ट में इतनी जानकारी प्रदान नहीं की गई है जो प्रतिवादी को आरोपों के बारे में सार्थक नोटिस देने हेतु जाँचकर्ता को सक्षम बनाने के लिए पर्याप्त हो, तो आगे कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी और PADH जाँच बंद कर दी जाएगी।

अगर जाँचकर्ता यह निर्धारित करता है कि परिस्थितियों पर विश्वविद्यालय द्वारा आगे ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है, तो रिपोर्ट को वैकल्पिक समाधान या विश्वविद्यालय की अन्य लागू होने वाली नीतियों के अनुसरण में कार्रवाई के लिए संदर्भित किया जा सकता है।

 

B.   जाँचकर्ता द्वारा शिकायतकर्ता(ओं) से संपर्क/इंटरव्यू

प्रतिवादियों से यह भी अपेक्षा की जाती है कि वे जाँचकर्ता द्वारा मीटिंग के लिए किए गए अनुरोध का तुरंत जवाब दें, जिसमें आरंभिक संपर्क के बाद दस (10) कार्य दिवसों के भीतर स्वयं को इंटरव्यू के लिए उपलब्ध कराना शामिल है। जब शिकायतकर्ता जाँचकर्ता को ऐसी अपरिहार्य परिस्थितियों के बारे में जानकारी प्रदान करता है[7] जिनकी वजह से वह दस (10) दिनों के भीतर मिलने में असमर्थ है, तो जाँचकर्ता के विवेकाधिकार पर इस समय-सीमा का विस्तार किया जा सकता है।

 

जब जाँचकर्ता प्रतिवादी(प्रतिवादियों) से आरभिक संपर्क करता है, तो वे शिकायतकर्ता(ओं) का(के) नाम और आरोपों को शेयर करेंगे, ताकि प्रतिवादी(प्रतिवादियों) को मीटिंग से पहले तैयारी करने का समय मिल सके। जाँच के दौरान आरोप जोड़े जा सकते हैं; ऐसी स्थिति में, प्रतिवादी को आरोपों की एक अपडेट की गई सूची प्रदान की जाएगी और जवाब देने का अवसर दिया जाएगा।

 

C.   गवाह

गवाहों से PADH जाँच के हिस्से के रूप में मिलने के लिए जाँचकर्ता के अनुरोधों का, पालन करने की अपेक्षा की जाती है। गवाह पक्षकारों और/या निर्धारण पैनल और अपील पैनल से अपनी पहचान को गुमनाम रखने का अनुरोध कर सकते हैं। अगर कोई गवाह जाँचकर्ता के संपर्क का जवाब नहीं देता है, तो इंटरव्यू के लिए गवाह की उपस्थिति को आसान बनाने के लिए उसके पर्यवेक्षक को नियुक्त किया जाएगा (नीचे इस पर आगे चर्चा की गई है)।

 

जो गवाह प्रतिवादी के संबंध में अपनी स्वयं की चिंताओं से संबंधित जानकारी शेयर करते हैं, उन्हें अपनी स्वयं की PADH रिपोर्ट प्रस्तुत करने के विकल्प के बारे में सूचित किया जा सकता है।

 

पक्षकारो और गवाहों को याद दिलाया जाएगा कि प्रतिशोध लेना प्रतिबंधित है।

 

किसी जाँच के हिस्से के रूप में क्या अपेक्षा की जाए, इस बारे में प्रश्न PADH@Rochester.edu पर नागरिक अधिकार अनुपालन टीम से पूछे जा सकते हैं।

D.      सहायक व्यक्ति

इस नीति के तहत की गई जाँच-पड़तालें पूरी तरह से आंतरिक हैं। पक्षकार प्रक्रिया में अपनी भागीदारी के किसी भी हिस्से के दौरान किसी सहायक व्यक्ति को साथ रख सकते हैं।  जाँचकर्ता इंटरव्यूों के निमंत्रण-पत्र में सहायक व्यक्तियों को शामिल करेंगे, और पक्षकार यह अनुरोध कर सकता है कि सहायक व्यक्तियों को अन्य पत्र-व्यवहारों में भी शामिल किया जाए।

 

इंटरव्यू के दौरान, सहायक व्यक्ति को पक्षकार को मौन समर्थन देने की अनुमति होती है, किंतु वह उनकी ओर से बोल नहीं सकता या हस्तक्षेप नहीं कर/दख़ल नहीं दे सकता है। पक्षकार को सहायता माँगने या अपने सहायक व्यक्ति से परामर्श करने के लिए अंतराल (ब्रेक) का अनुरोध करना चाहिए, और इसके लिए निजी स्थान उपलब्ध कराया जाएगा।

 

जाँचकर्ता सहायक व्यक्ति के साथ जाँच से संबंधित मूलभूत या प्रक्रियात्मक मामलों पर सीधे बातचीत नहीं करेंगे।

E.    PADH जाँच में पर्यवेक्षक के उत्तरदायित्व

विश्वविद्यालय के ऐसे किसी भी कर्मचारी, जिसके पास पर्यवेक्षी उत्तरदायित्व है, के लिए यह आवश्यक है कि वह PADH जाँच में सहयोग करे, जिसमें इंटरव्यूों में भागीदारी के अनुरोधों का तुरंत जवाब देना और जब वे छुट्टी पर न हों तो काम के घंटों के दौरान हर समय इंटरव्यू के लिए स्वयं को उपलब्ध कराना शामिल है, लेकिन इन्हीं तक सीमित नहीं है। पर्यवेक्षकों के लिए भी यह आवश्यक है कि वे नागरिक अधिकार अनुपालन टीम को यह सुनिश्चित करके सहायता प्रदान करें कि, अनुरोध किए जाने पर तुरंत, उस यूनिट के लिए प्राथमिकता के रूप में जिसका वे पर्यवेक्षण करते हैं, पक्षकारों और गवाहों को, जो कर्मचारी हैं, कारोबारी घंटों के दौरान इंटरव्यूों में भागीदारी करने के लिए समय की अनुमति दी जाए।

 

F.    अंतरिम कार्यवाही

विश्वविद्यालय के पास जाँच के दौरान लोगों या काम करने, सीखने, मरीज़ों की देखभाल या रहने के वातावरण की सुरक्षा के लिए, या PADH प्रक्रिया की गोपनीयता और ईमानदारी की रक्षा के लिए अंतरिम कार्यवाही लागू करने का अधिकार है। अंतरिम कार्यवाहियों में निम्नलिखित, लेकिन इन्हीं तक सीमित नहीं, शामिल हो सकते हैं:

 

  • लोगों को अस्थायी छुट्टी पर रखा जाना
  • कार्यक्रम और/या सुविधा-स्थलों से बाहर करना
  • काम करने, सीखने, मरीज़ की देखभाल या रहने की व्यवस्थाओं में बदलाव करना

 

जब उपयुक्त समझा जाए, जाँचकर्ता पक्षकार को अंतरिम कार्यवाहियों की उपलब्धता के बारे में सूचित करेगा। जब कोई पक्षकार अपने इंटरव्यू के दौरान या जाँचकर्ता के साथ किसी अन्य संचार में अंतरिम कार्यवाही का अनुरोध करता है, या CRCT किसी अंतरिम कार्यवाही की संभावित आवश्यकता की पहचान करती है, तो वह अनुरोध या अनुशंसा संबंधित मानव संसाधन परिचालन निदेशक को संप्रेषित की जाएगी, जो उपयुक्त प्रशासनिक कर्मियों के साथ बातचीत को सुगम बनाएगा। जब कर्मचारी एक शामिल पक्षकार होता है, तो इस संप्रेषण में HRBP को भी शामिल किया जाएगा और वह उपयुक्त अंतरिम कार्यवाही(यों) का मूल्यांकन करने, तय करने और कार्यान्वित करने के लिए सीधे प्रबंधक/पदाधिकारी(लीडर)/पर्यवेक्षक के साथ काम कर सकता है। जब संकाय सदस्य एक शामिल पक्षकार होता है, तो एक व्यवहार्य अंतरिम कार्यवाही निर्धारित करने और कार्यान्वित करने के लिए चिकित्सा केन्द्र में अधिष्ठाता (डीन) या उपयुक्त संकाय पदाधिकारी (लीडर) से परामर्श किया जाएगा। HR परिचालन निदेशक यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा कि अनुरोधित या अनुशंसित अंतरिम कार्यवाही के बारे में HR परिचालन निदेशक को CRCT के नोटिस के अधिकतम सात (7) कार्य दिवसों के भीतर अंतरिम कार्यवाही यथास्थान है।

 

जब संबंधित मानव संसाधन परिचालन निदेशक प्रतिवादी होता है, तो CRCT किसी अन्य उपयुक्त व्यक्ति की पहचान करेगा जिसे यह अनुशंसा भेजी जाएगी कि किसी अंतरिम कार्यवाही का मूल्यांकन और/या कार्यान्वयन किया जाए।

 

आम तौर पर, अंतरिम कार्यवाही PADH प्रक्रिया की अवधि तक विस्तारित रहेंगे, और प्रक्रिया की समाप्ति होने के बाद भी विस्तारित रह सकते हैं।

G.   जाँच रिपोर्ट और पक्षकारों का समीक्षा करने और जवाब देने का अवसर

जब जाँचकर्ता यह मान लेता है कि जाँच पूरी हो गई है उसके बाद, पक्षकारों को जाँच रिपोर्ट के एक प्रारूप (ड्राफ़्ट) तक इलेक्ट्रॉनिक पहुंच प्रदान की जाएगी। जाँच रिपोर्ट के प्रारूप में जाँच के दौरान अपनाए गए चरणों और सूचनाओं के स्रोतों का सारांश शामिल होता है, और जाँच के दौरान इकट्ठे किए गए सभी संबंधित प्रमाणों (पक्षकारों और गवाहों के बयानों, अन्य सूचनाओं, और दस्तावेज़ों) का समेकित विश्लेषण किया जाता है। रिपोर्ट के प्रारूप में गवाहों के नाम शामिल नहीं किए जाएँगे और इसमें कानूनों के आधार पर व्यक्तिगत रूप से पहचान योग्य जानकारी में संशोधन शामिल किए जा सकते हैं, जिसमें FERPA और HIPAA भी शामिल हैं लेकिन इन्हीं तक सीमित नहीं हैं।

 

पक्षकारों के पास रिपोर्ट के प्रारूप की समीक्षा करने और, अगर वांछित हो, तो सीधे जाँचकर्ता को लिखित जवाब देने के लिए क्रमागत पाँच (5) कार्य दिवस का समय होगा। रिपोर्ट की समीक्षा करने के लिए युक्तिसंगत समायोजन प्रदान किए जाने से संबंधित अनुरोधों का सम्मान किया जाएगा। लिखित जवाब एक इंच मार्जिन वाले, डबल-स्पेस वाले, बारह (12) पॉइंट टाइम्स न्यू रोमन फ़ॉन्ट में, पाँच (5) पृष्ठों से अधिक नहीं हो सकता है। जाँचकर्ता किसी भी पक्षकार द्वारा दी गई प्रतिक्रिया पर विचार करेगा और जाँच रिपोर्ट को अंतिम रूप देने से पहले यह निर्धारित करेगा कि आगे जाँच की आवश्यकता है या नहीं। पक्षकारों के लिखे हुए जवाबों को जाँच रिकॉर्ड में शामिल किया जाएगा और, जाँचकर्ता के विवेकाधिकार पर, पक्षकार के जवाबों में से कुछ जानकारियों को अंतिम जाँच रिपोर्ट में शामिल किया जा सकता है।

 

अंतिम जाँच रिपोर्ट में जाँच के दौरान अपनाए गए चरणों और सूचनाओं के स्रोतों का सारांश शामिल होता है, और जाँच के दौरान इकट्ठे किए गए सभी संबंधित प्रमाणों का समेकित विश्लेषण किया जाता है, और प्रमाणों की प्रबलता के मानदंड के आधार पर जाँचकर्ता के तथ्यात्मक निष्कर्ष प्रस्तुत किए जाते हैं, जिसका मतलब है कि रिकॉर्ड में मौजूद प्रमाणों के आधार पर इस बात का आंकलन किया जाता है कि क्या घटित होने की, घटित न होने की अपेक्षा, अधिक संभावना है।

 

जाँच रिपोर्ट के प्रारूप की समीक्षा करने के अपने अपसर का प्रयोग करते समय, पक्षकारों को इस नीति के तहत प्रतिशोध पर निषेध लगाने के प्रति सचेत रहना चाहिए।

H.   समय (टाइमिंग)

नागरिक अधिकार अनुपालन टीम, शिकायतकर्ता से जाँचकर्ता के आरंभिक संपर्क (आउटरीच) के पचास (50) कार्य दिवसों के अंदर-अंदर जाँच पूरी करने की कोशिश करती है। जाँच की अवधि कई कारकों पर निर्भर करती है, जिसमें पक्षकारों और गवाहों की संख्या, आरोपों का दायरा और क्या जाँच के दौरान अतिरिक्त PADH आरोप लगाए गए हैं, मीटिंगों के अनुरोधों और प्रक्रिया में भाग लेने के अन्य अवसरों के प्रति पक्षकारों और गवाहों की समय पर प्रतिक्रिया देने की तत्परता, और प्रस्तुत किए गए संबंधित दस्तावेज़ों की मात्रा और अन्य प्रमाण शामिल है, लेकिन यह इन्हीं तक सीमित नहीं है। दूसरे शब्दों में, कुछ जाँचें एक महीने में पूरी हो सकती हैं, जबकि अन्य जाँचों को पूरी तरह और व्यापक रूप से जाँच करने में अधिक लंबा समय लग सकता है। जाँच के दौरान CRCT पूरी समय-सीमा का ध्यान रखेंगे और जाँच की प्रगति के बारे में संबंधित पक्षों को समय-समय पर जानकारी देते रहेंगे।

I.      जाँच के बाद अगला चरण

जाँच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई के लिए कई विकल्प हो सकते हैं:

  • अगर जाँचकर्ता यह निष्कर्ष निकालता है कि उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर संरक्षित श्रेणी के आधार पर भेदभाव या उत्पीड़न के आरोप सिद्ध नहीं होते हैं, और नागरिक अधिकार अनुपालन के सहायक उपाध्यक्ष (AVP) का अनुमोदन प्राप्त हो जाता है, तो जाँच बंद की जा सकती है या मामले को विश्वविद्यालय की अन्य नीतियों के अनुसार आगे की कार्रवाई के लिए भेजा जा सकता है।
  • अगर उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर संरक्षित श्रेणी के आधार पर भेदभाव या उत्पीड़न का केवल एक आरोप सिद्ध होता है और शेष आरोपों पर अधिक शीघ्र कार्रवाई करना उचित माना जाता है, तो मामले को वैकल्पिक समाधान के लिए भेजने के लिए आवश्यक अनुमोदन प्राप्त किया जाना।
  • निर्धारण पैनल के अध्यक्ष को अंतिम जाँच की रिपोर्ट और जाँच रिकॉर्ड तक पहुंच प्रदान करके निर्णय लेने की प्रक्रिया आरंभ किया जाना। जब एक ही प्रतिवादी या प्रतिवादियों के बारे में कई रिपोर्टें हों, तो उस स्थिति में, उसी प्रतिवादी (उन प्रतिवादियों) से संबंधित सभी मामलों पर निर्णय लेने के लिए एक ही निर्णय पैनल का गठन किया जा सकता है। निर्णय लेने की प्रक्रिया के बारे में अधिक जानकारी अगले अनुभाग में दी गई है।

VIII.    निर्णय लेने की प्रक्रियाएँ

 

निर्धारण पैनल के अध्यक्ष का चयन नीचे दी गई तालिका के आधार पर किया जाएगा, और फिर वह तीन या पाँच सदस्यों वाला[8] पैनल गठित करने के लिए अन्य सदस्यों का चयन करेगा।  डिफ़ॉल्ट निर्णय पैनल अध्यक्ष को यह विवेकाधिकार प्राप्त है कि वे अपने समान पद या स्तर के किसी प्रतिनिधि को अध्यक्ष के रूप में नियुक्त करें। इकट्ठे मिलकर, निर्णय पैनल सामूहिक रूप से यह तय करेगा कि संरक्षित श्रेणी के आधार पर भेदभाव, उत्पीड़न और/या प्रतिशोध से संबंधित आरोपों के संबंध में स्थापित तथ्य इस नीति के उल्लंघन की पुष्टि करते हैं या नहीं।

 

न्यूयॉर्क राज्य के कानून के अनुसार, विश्वविद्यालय के अधिकारियों के विरुद्ध की गई शिकायतों की निगरानी न्यासी मंडल की लेखा-परीक्षण समिति करती है, जो यह निर्धारित कर सकती है कि किसी शिकायत का निपटारा इस नीति के अंतर्गत निर्णय पैनल और अपील पैनल पर लागू प्रक्रिया से अलग किसी अन्य प्रक्रिया के जरिए करना अधिक उपयुक्त होगा।

 

जिसके विरुद्ध शिकायत है: पैनल का अध्यक्ष होगा:
संकाय का कोई सदस्य या किसी संकाय प्रक्रिया को शामिल करने वाली भेदभाव संबंधी चिंताएँ उस विद्यालय का डीन जहाँ प्रतिवादी की प्राथमिक नियुक्ति है या जहाँ चुनौती दी गई प्रक्रिया होती है
किसी विद्यालय या कॉलेज का स्टाफ़ कर्मचारी उत्तरदाता के विद्यालय या कॉलेज का डीन
स्टाफ़ कर्मचारी – रिवर (River) कैंपस लाइब्रेरीज वाइस प्रोवोस्ट और लाइब्रेरी का डीन
स्टाफ़ कर्मचारी – लैबोरेटरी फॉर लेज़र एनर्जेटिक्स लैबोरेटरी फॉर लेज़र एनर्जेटिक्स के निदेशक
स्टाफ़ कर्मचारी – मेमोरियल आर्ट गैलरी मेमोरियल आर्ट गैलरी के निदेशक
 

स्टाफ़ कर्मचारी – स्ट्रॉन्ग (Strong) मेमोरियल हॉस्पिटल

स्ट्रॉन्ग (Strong) मेमोरियल हॉस्पिटल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (या नामित व्यक्ति)
 

स्टाफ़ कर्मचारी – केन्द्रीय प्रशासन

प्रतिवादी के प्रभाग/यूनिट का उपाध्यक्ष (या नामित व्यक्ति)
 

पोस्ट-डॉक्टरल फेलो या एसोसिएट

उत्तरदाता के विद्यालय के ग्रैजुएट स्टडीज के डीन का समकक्ष
विद्यालय या महाविद्यालय का डीन प्रोवोस्ट (शैक्षणिक मामलों के प्रमुख अधिकारी)
विश्वविद्यालय के अधिकारी और न्यासी न्यासी मंडल की लेखा-परीक्षण समिति द्वारा तय किया जाएगा[9]
 

कवर्ड व्यक्ति (नॉन-हॉस्पिटल)

वित्त एवं प्रशासन का सीनियर उपाध्यक्ष (या नामित व्यक्ति)
स्ट्रॉन्ग (Strong) मेमोरियल हॉस्पिटल में कवर्ड व्यक्ति स्ट्रॉन्ग (Strong) मेमोरियल हॉस्पिटल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (या नामित व्यक्ति)

 

A.   पैनल के सदस्यों को अधिसूचना और आपत्ति करने का अवसर

निर्धारण पैनल के जुट जाने के बाद और पैनल की मीटिंग से पहले, पक्षकारों को पैनल की सदस्यता के बारे में सूचित किया जाएगा। इस अधिसूचना के दो (2) कार्य दिवसों के भीतर, जिस पक्षकार को हित के टकराव या पैनल के किसी सदस्य के निष्पक्ष रूप से सेवा करने की सामर्थ्य के बारे में शंकाएँ है, वह पैनल के अध्यक्ष को अपनी शंकाओं के बारे में बताते हुए संक्षेप में लिखकर भेज सकता है। पैनल का अध्यक्ष इन शंकाओं का मूल्यांकन करेगा और तय करेगा कि पैनल का सदस्य को बदलना है या नहीं। अगर बताई गई चिंता पैनल के अध्यक्ष के बारे में हो, तो पैनल का कोई अन्य सदस्य मूल्यांकन करके तय करेगा। यह निर्धारण किए जाने की स्थिति में कि पैनल का सदस्य आगे बढ़ सकता है, केवल उस पक्षकार को लिखित में सूचित किया जाएगा जिसने आपत्ति जताई है। यह निर्धारण किए जाने की स्थिति में कि पैनल के सदस्य को बदला जाना चाहिए, दोनों/सभी पक्षकारों को नए पैनल सदस्य के बारे में लिखित नोटिस प्राप्त होगा। जब ऐसी शंकाएँ उठाई जाती हैं, तो पैनल के किसी सदस्य के कथित हितों के टकराव या निष्पक्ष रूप से कार्य करने में असमर्थता के संबंध में अंतिम निर्णय होने तक इस नीति के उल्लंघन से संबंधित निर्णय जारी करने की समय-सीमा स्थगित रहेगी।

B.   निर्णय लेने के लिए विचार-विमर्

अपना निर्णय लेने के लिए, पैनल को अंतिम जाँच रिपोर्ट और रिपोर्ट के प्रारूप पर पक्षकारों के जवाब, अगर कोई हों, उपलब्ध कराए जाएँगे और जाँच रिकॉर्ड तक उनकी पहुँच होगी। निर्णयकर्ता यह निर्धारित करने के लिए कि उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर इस नीति का उल्लंघन हुआ है या नहीं, जाँचकर्ता द्वारा स्थापित तथ्यों पर इस नीति के संबंधित प्रावधानों को लागू करेंगे। पैनल के निर्णयों का बहुमत द्वारा अनुमोदन किया जाना ज़रूरी है। अगर इस नीति का कोई उल्लंघन पाया जाता है, तो पैनल विश्वविद्यालय की नीति और प्रथा के अनुरूप उचित सुधारात्मक कार्यवाहियों की पहचान करेगा।

 

पैनल में सेवा करने वाले कर्मी, विश्वविद्यालय की नीति के अनुरूप, उनके विचार-विमर्श के लिए प्रदान की गई सामग्री में प्रकट की गई किसी भी जानकारी को गोपनीय रखेंगे।

C.   लिखित निर्णय जारी करने की समय-सीमा

पैनल आमतौर पर पैनल की पहली मीटिंग के बाद बीस (20) कार्य दिवसों के भीतर एक लिखित निर्णय जारी करेगा। पैनल अध्यक्ष के पास इस समय-सीमा को बढ़ाने का विवेकाधिकार है। पक्षकारों को भेजे गए लिखित निर्णय में जाँच के निष्कर्षों का सारांश शामिल होगा, और इसमें इस बारे में भी निष्कर्ष शामिल होगा कि क्या किसी प्रतिवादी ने नीति का उल्लंघन किया है और कि क्या सुधारात्मक कार्रवाई आवश्यक है।

 

संबंधित HR संचालन निदेशक को निर्धारण पैनल के निर्णय की प्रतिलिपि भेजी जाएगी।

D.   पैनल निर्धारण के संभावित परिणाम

जब किसी प्रतिवादी को इस नीति का उल्लंघन करते हुए पाया जाता है, तो निर्धारण पैनल को उपयुक्त परिणामों को लागू करने का पूरा अधिकार होता है[10], जो तथ्यों और उल्लंघन(नों) के विशिष्ट निष्कर्षों पर आधारित होते हैं। उपयुक्त परिणाम निर्धारित करने में, पैनल के अध्यक्ष का संबंधित वरिष्ठ पदाधिकारी (सीनियर लीडर), वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं प्रमुख मानव संसाधन अधिकारी, और/या उपाध्यक्ष सहभागिता एवं संवर्धन से परामर्श लेने का विवेकाधिकार है। संकाय सदस्य और कर्मचारी प्रतिवादी पर लागू किए गये अनुशासनात्मक, सुधारात्मक या उपचारात्मक कार्यवाहियों में निम्नलिखित शामिल हो सकते हैं, लेकिन ये इन्हीं तक सीमित नहीं हैं:

  • नौकरी से निकालना
  • पदावनति
  • कार्यकाल के निरस्तीकरण या अनुबंध के रड्ड किए जाने के लिए कार्यकाल और विशेषाधिकार पर विश्वविद्यालय समिति को प्रस्तुतिकरण[11]
  • अनुबंध का नवीनीकरण न होना
  • काम संबंधी दायित्वों का फिर से निर्धारण / काम संबंधी दायित्वों में परिवर्तन
  • क्षतिपूर्ति में कटौती या वेतन में वृद्धि या अन्य संसाधनों को रोकना
  • नैदानिक विशेषाधिकारों का खंडन या निलंबन
  • प्रशासनिक कर्तव्यों या काम संबंधी दायित्वों का खंडन
  • संकाय/कर्मचारी की फाइल में उल्लंघन और परिणामों का दस्तावेजीकरण
  • अनिवार्य प्रशिक्षण
  • पर्यवेक्षण या लगातार निगरानी
  • वेतन रहित निलंबन
  • लिखित अनुशासनात्मक चेतावनी
  • इस नीति के उल्लंघन की रिपोर्ट अनुदान प्रदान करने वाले या लाइसेंस देने वाले उचित प्राधिकारी को करना, यदि अपेक्षित हो

 

जब प्रतिवादी एक कवर्ड व्यक्ति है, तो परिणामस्वरूप विश्वविद्यालय की सम्पत्तियों में प्रवेश पर प्रतिबंध और/या विश्वविद्यालय की सम्पत्तियों तक पहुंचने पर सीमाएँ लगाना शामिल हो सकते हैं।

 

ऐसा निष्कर्ष कि आचरण ने इस नीति का उल्लंघन नहीं किया, विश्वविद्यालय को सुधारात्मक कार्यवाहियों को आवश्यक बनाने से नहीं रोकता है, जिसमें अनिवार्य प्रशिक्षण या कोचिंग को आवश्यक बनाना शामिल है, लेकिन इन्हीं तक सीमित नहीं है। इसी तरह, विश्वविद्यालय यह निर्धारित कर सकता है कि कुछ गैर-अनुशासनात्मक शैक्षणिक अवसर (जैसे कि प्रशिक्षण या मार्गदर्शन सत्र) आवश्यक हैं।

 

जब इस बात का निर्धारण हो जाता है कि इस नीति का उल्लंघन नहीं हुआ था, लेकिन 1) आचरण इस बात का सूचक है कि अगला कदम उठाने की आवश्यकता है या 2) जाँच में ऐसा आचरण प्रकट हुआ है जिससे विश्वविद्यालय की किसी अन्य नीति या नियम का उल्लंघन हुआ है, तो विश्वविद्यालय को अनुशासनात्मक, सुधारात्मक या उपचारात्मक कार्यवाही करने का विवेकाधिकार है। इसके अतिरिक्त, किसी पैनल के निर्धारण के जरिए समाधान के बावजूद, अगर यह आरोप लगता है या प्रकट होता है कि आचरण विश्वविद्यालय की किसी अन्य नीति या नियम का उल्लंघन कर सकता है, तो विश्वविद्यालय एक दूसरी जाँच या समीक्षा आरंभ कर सकता है जिसके परिणामस्वरूप उस आचरण के आधार पर अनुशासनात्मक, सुधारात्मक या उपचारात्मक कार्यवाहियाँ की जा सकती हैं।

 

पक्षकारों के पास निर्धारण पैनल के निर्णय के विरुद्ध अपील करने का अवसर होता है। अपील प्रक्रिया का वर्णन नीचे किया गया है।

IX.    अपील

A.   अपील की बुनियाद

पक्षकार निम्नलिखित में से एक या एक से अधिक बुनियादों पर लिखित अपील प्रस्तुत कर सकते हैं:

  1. नए खोजे गए प्रमाण जो पक्षकार के पास पहले उपलब्ध नहीं थे और जो निर्धारण पैनल के निर्णय का परिणाम बदल सकते हैं;
  2. निर्धारण पैनल के निर्णय का परिणाम देने वाली प्रक्रिया में महत्वपूर्ण दोष जो निर्णय का परिणाम बदल सकते हैं; या
  3. अधिरोपित सुधारात्मक कार्रवाई की गंभीरता या उयुक्तता।

 

महत्वपूर्ण बात यह है कि, अपील का प्रयोजन कोई दूसरी जाँच करवाना, या जाँचकर्ता के तथ्यात्मक निष्कर्षों के औचित्य या नीति उल्लंघन के बारे में निर्धारण पैनल के निर्णय के औचित्य पर पुनः चर्चा करना नहीं है, जब तक कि पक्षकार की अपील की दलीलें अपील की बुनियादों में से एक के भीतर न आती हों।

B.   फ़ाइनल जाँच रिपोर्ट तक पहुंच; अपील की समय-सीमा और प्रारूप

पक्षकार यह निर्णय लेने के लिए कि वे अपील करें या नहीं या अपनी अपील की विषय-वस्तु सूचित करने के लिए, अंतिम जाँच रिपोर्ट तक इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से पहुंच प्रदान किए जाने का अनुरोध कर सकते हैं। अंतिम जाँच रिपोर्ट तक इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से पहुंच लगातार तीन (3) कार्य दिवसों तक दी जाएगी। रिपोर्ट की समीक्षा करने के लिए युक्तिसंगत समायोजन प्रदान किए जाने से संबंधित अनुरोधों का सम्मान किया जाएगा।

 

अपील, निर्धारण पैनल के निर्णय पत्र में पहचाने गये अपील पैनल अध्यक्ष (या नामित व्यक्ति) को, पत्र जारी होने के दस (10) कार्य दिवसों के भीतर, लिखित में अवश्य प्रस्तुत की जानी चाहिए। यह समय-सीमा केवल अपरिहार्य परिस्थितियों[12] में ही बढ़ाई जाएगी, जिनके बारे में अपील करने वाला पक्षकार अपील की समय-सीमा समाप्ति से पहले अपील पैनल के अध्यक्ष को लिखित में स्पष्टीकरण देगा। समय-सीमा समाप्ति की तारीख (डेडलाइन) को बढ़ाने का निर्णय अध्यक्ष के विवेकाधिकार पर है।

 

अपील प्रस्तुतियाँ एक इंच मार्जिन वाले, डबल-स्पेस वाले, बारह (12) पॉइंट टाइम्स न्यू रोमन फ़ॉन्ट में, केवल पाँच (5) पृष्ठों तक सीमित होती हैं।

C.   अपील प्रस्तुतियों के बारे में पक्षकारों को अधिसूचना

जब अपील की समय-सीमा समाप्त हो जाएगी, तो पक्षकारों को अधिसूचित किया जाएगा कि क्या कोई अपील प्रस्तुत की गई थी या यह कि अपील करने की समय-सीमा समाप्त हो गई है और कोई अपील प्रस्तुत नहीं की गई थी। अपील न करने वाले किसी पक्षकार को यह अधिसूचना कि अन्य पक्षकार ने अपील की है, अपील न करने वाली पक्षकार के लिए अपनी अपील प्रस्तुत करने की समय-सीमा को नहीं बढ़ाती है।

D.   अपील पैनल का अध्यक्ष और सदस्यता

सामान्यतः, जब प्रतिवादी:

  • स्टाफ़ का कोई सदस्य या कवर्ड व्यक्ति (उदाहरण के लिए आगंतुक, मरीज़ या संविदाकार) हो, तो: अध्यक्ष के प्रमुख स्टाफ अधिकारी, या उनका नामित व्यक्ति, अपील पैनल अध्यक्ष के रूप में काम करेगा
  • संकाय का कोई सदस्य हो, तो: प्रोवोस्ट या नामित व्यक्ति, अपील पैनल अध्यक्ष के रूप में काम करेगा

 

अपील प्राप्त होने पर, अपील पैनल का अध्यक्ष दो और सदस्यों की नियुक्ति करेगा, लेकिन पक्षकारों की अपील की समय-सीमा समाप्त होने से पहले पैनल मीटिंग नहीं करेगा। अपील पैनल में निर्धारण पैनल का कोई भी सदस्य शामिल नहीं हो सकता है।

E.   अपील पैनल के विचार-विमर्श और उसकी कार्रवाइयाँ

अपना निर्णय लेने के लिए, अपील पैनल को अंतिम जाँच रिपोर्ट, प्रारूप जाँच रिपोर्ट पर पक्षकार के जवाबों, निर्धारण पैनल के निर्णय पत्र, और जाँच फाइल की समस्त सामग्री, जिसे वे अपील पर निर्णय करने के लिए आवश्यक समझते हैं, तक पहुंच प्राप्त होगी।

 

अपील पैनल निम्नलिखित कार्रवाइयाँ कर सकते हैं:

  1. निर्धारण पैनल के निर्णय की पुष्टि करना
  2. नए प्रमाणों, कथित प्रक्रियात्मक त्रुटि या विशिष्ट कार्रवाइयों की समीक्षा करने के लिए मूल जाँचकर्ता और/या निर्धारण पैनल के पास पुनर्विचार हेतु भेजना
  3. हित के टकराव या निष्पक्ष रूप से सेवा करने में असमर्थता के मामलों में, किसी नए जाँचकर्ता या निर्धारण पैनल को भेजना
  4. निर्दिष्ट की गई सुधारात्मक कार्रवाई या अनुशासनात्मक कार्रवाई को संशोधित करना

 

F.    लिखित निर्णय का समय और विषय-वस्तु

साधारणतः, अपील पैनल का अध्यक्ष अपील पैनल की पहली मीटिंग के अधिकतम बीस (20) कार्य दिवसों के भीतर एक लिखित निर्णय जारी करेगा। अपील पैनल के अध्यक्ष को इस समय-सीमा को बढ़ाने का विवेकाधिकार है।

 

जब अपील पैनल ऊपर 1, 2 या 3 में वर्णन किए गए अनुसार कोई कार्रवाई करेगा, तो पक्षकारों को वही नोटिस प्रदान किया जाएगा। अपील पैनल का निर्णय अंतिम होता है। संबंधित HR परिचालन निदेशक को अपील पैनल के निर्णय की प्रतिलिपि भेजी जाएगी।

X.           संबंधित पदाधिकारी (लीडर) को अधिसूचना और अगले चरणों के लिए उत्तरदायित्व

 

अपील पैनल के निर्णय द्वारा पैनल के निर्धारण को कायम रखे जाने, या कोई अपील दायर हुए बिना अपील करने की अवधि समाप्त हो जाने के बाद, अगर नीति के उल्लंघन का निष्कर्ष निकला हो तो उस सीमा तक संबंधित मानव संसाधन परिचालन निदेशक समेत उपयुक्त प्रशासनिक कार्मिक को अंतिम निर्धारण उपलब्ध कराया जाएगा, या भले ही नीति का कोई उल्लंघन न हुआ हो, तब भी उन्हें अगला चरण निर्दिष्ट किया जाएगा।

 

HR परिचालन निदेशक निर्धारण के लिए आवश्यक अगले चरणों को पूरा करने में सहायता करेगा और उन पर निगाह रखेगा।

XI.       गोपनीयता

 

विश्वविद्यालय पक्षकारों और गवाहों की गोपनीयता की रक्षा के लिए उचित कदम उठाएगा। पक्षकार अपने अनुभव शेयर करने के लिए स्वतंत्र रहते हैं, लेकिन आम तौर पर उन लोगों की संख्या को सीमित करने की सलाह दी जाती है जिन पर वे विश्वास करते हैं। पक्षकारों, गवाहों और सहायक व्यक्तियों को सलाह दी जाएगी कि रिपोर्ट या जाँच के बारे में जानकारी को प्रकट करने से जाँच की ईमानदारी से समझौता होने, काम करने, सीखने, और रहने के माहौल में विघ्न आने, घटनाओं की धारणाओं और स्मृतियों के प्रभावित होने की संभावना है और, कुछ परिस्थितियों में, इसे जाँच-पड़ताल में किसी भागीदार के विरुद्ध प्रतिशोध के रूप में माना जा सकता है। जैसा कि ऊपर बताया गया है, प्रतिशोध की कार्रवाई इस नीति का उल्लंघन है।

 

HR परिचालन निदेशक और अन्य यथोचित प्रशासनिक कार्मिकों को नागरिक अधिकार अनुपालन टीम को दिए गए PADH रिपोर्ट के बारे में, और/या जब किसी अंतरिम कार्यवाही(हियों) को निर्धारित करने की आवश्यकता होगी तब, अधिसूचित किया जाएगा।

 

अनुभाग X में बताए गए के सिवाय, निर्धारण प्रक्रिया का परिणाम केवल पक्षकारों के साथ ही शेयर किया जाएगा, न कि गवाहों या रिपोर्ट करने वाले व्यक्ति (अगर शिकायतकर्ता के अलावा कोई अन्य हो) के साथ। हालांकि, अध्यक्ष, नागरिक अधिकार अनुपालन टीम या पैनल का अध्यक्ष, विधिक परामर्श कार्यालय के साथ परामर्श से, जाँच के दौरान प्राप्त किए गए रिपोर्ट या अन्य जानकारियों को, जैसा कानून या विनियमन द्वारा अपेक्षित या अन्यथा उपयुक्त हो, प्रकट कर सकता है।

 

विश्वविद्यालय इस नीति से संबंधित समेकित एवं पहचान-रहित रिपोर्ट करने में शामिल होने का अधिकार अपने पास सुरक्षित रखता है।

XII.       रिकॉर्डपालन (रिकॉर्ड कीपिंग)

 

जब इस प्रक्रिया के परिणामस्वरूप यह निर्धारण होता है कि इस नीति का उल्लंघन हुआ है और परामर्श, अनुशासनात्मक कार्रवाई या अन्य सुधारात्मक/उपचारात्मक कार्रवाई निर्दिष्ट की गई है (इसमें अनुशंसित शैक्षणिक अवसर शामिल नहीं हैं), तो निर्धारण पैनल के निर्णय को (और, अगर लागू हो, तो अपील पैनल के निर्णय को) प्रतिवादी की कार्मिक फाइल में मानव संसाधन विभाग (कर्मचारियों के लिए) में या प्रोवोस्ट कार्यालय (संकाय सदस्य के लिए) में रखा जाएगा। विश्वविद्यालय में किसी अन्य भूमिका के लिए आवेदन करते समय, किसी प्रतिवादी से पूछा जा सकता है कि क्या उसे इस नीति के उल्लंघन के लिए उत्तरदायी पाया गया है और, उस मामले में, उसे स्पष्टीकरण देने का अवसर प्रदान किया जाएगा।

 

जब नीति के उल्लंघन का कोई निष्कर्ष न हो, लेकिन विश्वविद्यालय किसी जाँच के दौरान मिली जानकारी के आधार पर अन्य अनुशासनात्मक, सुधारात्मक या उपचारात्मक कार्रवाई (अनुशंसित शैक्षणिक अवसरों को छोड़कर) करता है, तो ऐसे कार्यवाहियों के संबंध में प्रलेखन उस व्यक्ति की कार्मिक फाइल में मानव संसाधन (कर्मचारियों के लिए) में या प्रोवोस्ट कार्यालय (संकाय सदस्य के लिए) में रखा जाएगा, और, जैसा उपयुक्त हो, एक प्रतिलिपि उस व्यक्ति के पर्यवेक्षक, अध्यक्ष, और/या अधिष्ठाता (डीन) को प्रदान की जा सकती है।

 

निर्धारण पैनल और/या अपील पैनल के जो भी निर्णय हैं उनकी एक प्रतिलिपि समेत, PADH मामले का पूरा रिकॉर्ड, नागरिक अधिकार अनुपालन टीम द्वारा अनुरक्षित किया जाएगा। तदनुसार, रिपोर्टों और की गई जो भी सुधारात्मक कार्रवाई हो उसका रिकॉर्ड नागरिक अधिकार अनुपालन टीम को अवश्य प्रदान किया जाना चाहिए।

XIII. समानांतर जाँच-पड़तालें

 

लागू होने वाले निजता और गोपनीयता कानूनों के अधीन, इस नीति में ऐसा कुछ भी नहीं है जो नागरिक अधिकार अनुपालन टीम और विश्वविद्यालय की किसी अन्य इकाई/विभाग/क्षेत्र, जिस पर उन आरोपों की जाँच करने के अपने कानूनी या अन्य दायित्व हैं जो किसी लंबित PADH जाँच का विषय भी हैं, के बीच संयुक्त जाँच करने और/या जानकारी शेयर करने से रोकता हो। जहाँ तक किसी अन्य जाँच में किसी संरक्षित श्रेणी के आधार पर किए गए भेदभाव, उत्पीड़न या प्रतिशोध के बारे में कोई निष्कर्ष निकाला गया हो, वहाँ PADH जाँच में निकाले गए निष्कर्ष अधिक्रमण करेंगे, जब तक कि वरिष्ठ उपाध्यक्ष (सीनियर वाइस प्रेसिडेंट) एवं प्रमुख मानव संसाधन अधिकारी और/या उपाध्यक्ष सहभागिता एवं संवर्धन यह निष्कर्ष न निकालें कि अन्य जाँच(जाँचों) के परिणामों को वरीयता दी जानी चाहिए।

 

XIV.   कर्मचारियों को न्यूयॉर्क राज्य द्वारा अपेक्षित अतिरिक्त सूचनाएँ

 

न्यूयॉर्क राज्य अपेक्षा करता है कि नियोक्ता कर्मचारियों, आवेदकों, संविदाकारों, और नियोक्ता के साथ व्यापार करने वाले अन्य व्यक्तियों को यौन उत्पीड़न के दावों के संबंध में कानूनी संरक्षणों और बाहरी समाधानों के बारे में जानकारी प्रदान करें। यह जानकारी परिशिष्ट D में निर्दिष्ट की गई है।

 

यद्यपि शिकायतकर्ता को किसी सरकारी एजेंसी या न्यायालय में कोई शिकायत दायर करने के लिए किसी प्राइवेट अटॉर्नी की आवश्यकता नहीं होती है, फिर भी शिकायतकर्ता किसी अटॉर्नी की कानूनी सलाह ले सकते हैं। मानव संसाधन कार्यालय, विश्वविद्यालय लोकपाल कार्यालय, विधिक परामर्श कार्यालय, विश्वविद्यालय सहभागिता एवं संवर्धन कार्यालय, और एसोसिएट उपाध्यक्ष नागरिक अधिकार अनुपालन, और/या नागरिक अधिकार जाँच निदेशक इस नीति के बारे में प्रश्नों के उत्तर दे सकते हैं, और सामान्यतया विश्वविद्यालय का कोई भी कर्मचारी या प्रतिनिधि किसी भी शिकायतकर्ता, प्रतिवादी या गवाह को कानूनी सलाह नहीं दे सकता है।

 

परिशिष्ट

परिशिष्ट A: ऐसे व्यवहार के उदाहरण जिन्हें उत्पीड़न माना जा सकता है

 

किसी संरक्षित श्रेणी पर आधारित ऐसे व्यवहार जो उत्पीड़न का गठन कर सकते हैं या उत्पीड़न की शिकायतों का परिणाम दे सकते हैं, उनमें शामिल हैं, लेकिन इन्हीं तक सीमित नहीं हैं:

  • शारीरिक हिंसा, शारीरिक हिंसा की धमकी, शारीरिक धमकी, या पीछा करना;
  • कार्यस्थल पर अपमानजनक सामग्री के प्रदर्शन, जिसमें कार्यस्थल के कंप्यूटरों, सोशल मीडिया, सेल फोन्स, या विश्वविद्यालय समुदाय के अन्य सदस्यों को दिखाई देने वाले किसी अन्य क्षेत्र पर प्रदर्शन शामिल हैं, जैसे कि:
    • छवियाँ, चित्र, पोस्टर्स, या वस्तुएँ; उदाहरण के लिए, अपमानजनक कार्टून, गुड़ियाएँ या कलाकृतियाँ; या
    • डराने-धमकाने वाले टेक्स्ट, भित्तिचित्र (ग्राफ़ीटीज़), या लिखित मैसेज जैसे कि संकेतपद, अपशब्द या धमकियाँ;
  • अन्य व्यवहार, जैसे कि अपमानजनक चुटकुले, अनादरपूर्ण वक्तव्य, संकेतपद या अपशब्द या रूढ़िवादी (स्टीरियोटाइपिंग) गतिविधियाँ;
  • सूक्ष्म भेदभावपूर्ण व्यवहार, जैसे कि सेक्स या नस्ल के आधार पर किसी की बुद्धिमत्ता के बारे में धारणा बनाना, या “आप वास्तव में कहाँ से हैं?” जैसी टिप्पणियाँ करना, या किसी व्यक्ति के लिंग की वजह से यह मान लेना कि वही मीटिंग के नोट्स तैयार करेगा/करेगी;
  • किसी व्यक्ति के कार्यस्थल, औजारों या उपकरण के साथ हस्तक्षेप करना, उन्हें नष्ट करना या क्षति पहुँचाना, या अन्यथा व्यक्ति की उसका काम करने की क्षमता में हस्तक्षेप करना;
  • किसी व्यक्ति के शारीरिक विशेषताओं, पहनावे या जीवनशैली के बारे में इस तरह से टिप्पणी करना जो किसी व्यक्ति को किसी संरक्षित श्रेणी में उसकी सदस्यता के आधार पर उसे नीचा दिखाता हो;
  • किसी व्यक्ति की संरक्षित श्रेणी में सदस्यता की वजह से व्यक्ति के काम में तोड़फोड़ करना; या
  • व्यक्ति की संरक्षित श्रेणी में सदस्यता के कारण उसे धमकाना, उस पर चिल्लाना या अभद्र नाम से पुकारना (नेम कॉलिंग)।
परिशिष्ट B: ऐसे व्यवहार के उदाहरण जिन्हें इस नीति के अंतर्गत आने वाले यौन उत्पीड़न माना जा सकता है

 

ऐसे व्यवहार जो यौन उत्पीड़न का गठन कर सकते हैं या यौन उत्पीड़न की शिकायतों का परिणाम दे सकते हैं, उनमें शामिल हैं, लेकिन इन्हीं तक सीमित नहीं हैं:

  • यौन प्रकृति के शारीरिक कृत्य, जैसे कि:
    • अवांछित और जानबूझकर स्पर्श करना, चुटकी काटना, थपथपाना, चूमना, गले लगाना, पकड़ना, किसी अन्य व्यक्ति के शरीर पर हाथ रगड़ना, या किसी अन्य व्यक्ति के शरीर या कपड़ों पर कोंचना;
  • सेक्सुअल एडवांसेस या यौन प्रस्ताव जो अवांछित हैं, जैसे कि:
    • अस्पष्ट या प्रत्यक्ष धमकियों/वादों के साथ यौन संबंधों के लिए अनुरोध, कि किसी व्यक्ति की अस्वीकार करने या समर्पण करने की इच्छा व्यक्ति की स्थिति, मजदूरी, उन्नति, प्रदर्शन मूल्यांकन, पदोन्नति, या अन्य लाभों (जैसे कि उपहार-देना) या क्षतियों (यह टाइटल Title IX व्यवहार भी हो सकता है) को प्रभावित करेगी;
    • अवांछित यौन गतिविधियों के लिए सूक्ष्म या स्पष्ट दबाव;
    • यौन छेड़खानी (जिसमें कुदृष्टि डालना या आसक्त नजर से देखना, या सामाजिक परस्पर क्रिया में शामिल होने का दबाव शामिल है); या
    • किसी व्यक्ति की लैंगिकता के बारे में यौन-उन्मुख इशारे, शोर, वक्तव्य, चुटकुले, या प्रश्न और टिप्पणियाँ;
  • कार्यस्थल में कहीं भी यौन या यौन रूप से अपमानजनक सामग्री का प्रदर्शन, जिसमें चित्र, पोस्टर, कैलेंडर, भित्तिचित्र, वस्तुएँ, पाठ या अन्य सामग्रियाँ, जो यौन रूप से अपमानजनक या अश्लील हैं, शामिल हैं किंतु इन्हीं तक सीमित नहीं हैं। इसमें कार्यस्थल पर कंप्यूटर, सेल फोन, या विश्वविद्यालय समुदाय के अन्य सदस्यों को दिखाई देने वाले किसी भी अन्य क्षेत्र पर प्रदर्शन शामिल हैं;
  • यौन रूढ़िवादिता, जो तब होती है जब किसी व्यक्ति के आचरण या व्यक्तित्व के लक्षणों का आंकलन इस बारे में किसी अन्य के विचारों या धारणाओं के आधार पर किया जाता है कि किसी विशेष लिंग को कैसा दिखना या कार्य करना चाहिए, जिसमें जिसमें किसी व्यक्ति की लिंग-अभिव्यक्ति के बारे में वक्तव्य या किसी व्यक्ति से पारंपरिक रूप से लैंगिक भूमिकाएँ निभाने का अनुरोध करना शामिल हो सकता है; या
  • किसी व्यक्ति के लिंग, यौन रुझान, लिंग पहचान या अभिव्यक्ति की वजह से उसके विरुद्ध किए गए शत्रुतापूर्ण कृत्य, जिसमें[13] व्यक्तिगत रूप से या अन्य साधनों से, ट्रांसजेंडर और जैंडर एक्सपैंसिव पहचानें भी शामिल हैं, जैसे कि:
  • किसी व्यक्ति के कार्यस्थल, औजारों या उपकरण में हस्तक्षेप करना, उन्हें नष्ट करना या क्षति पहुँचाना, या व्यक्ति के लिंग की वजह से कार्य करने की उसकी क्षमता में अन्यथा हस्तक्षेप करना;
  • किसी व्यक्ति के शरीर, पहनावे या जीवनशैली के बारे में ऐसी टिप्पणियाँ करना जिनके यौन निहितार्थ हों या जो व्यक्ति की लैंगिकता या लिंग को अपमानित करती हों;
  • किसी व्यक्ति के यौन की वजह से उसके काम में तोड़फोड़ करना;
  • व्यक्ति के यौन की वजह से धमकाना, चिल्लाना, या अभद्र नाम से पुकारना (नेम कॉलिंग);
  • किसी व्यक्ति के पसंदीदा सर्वनामों का जानबूझकर अनवरत और अपमानजनक दुरुपयोग; या
  • व्यक्तियों की कथित पहचान के आधार पर उनके लिए अलग-अलग अपेक्षाएँ बनाना।

 

NYS मॉडल यौन उत्पीड़न नीति से लिंग विविधता के बारे में जानकारियाँ

यौन उत्पीड़न को पहचानने के लिए लिंग की विविधता को समझना आवश्यक है क्योंकि यौन रूढ़िवादिता, लैंगिक अभिव्यक्ति और कथित अभिज्ञान के आधार पर भेदभाव सभी अवैध प्रकार के भेदभाव हैं। हालांकि लिंग एक सूक्ष्म निरंतरता है, लेकिन लोगों द्वारा पहचान करने के तीन सबसे सामान्य तरीके सिसजेंडर, ट्रांसजेंडर और नॉन-बाइनरी हैं। सिसजेंडर व्यक्ति वह है जिसका लिंग जन्म के समय उसे निर्धारित किए गए यौन (सेक्स) के साथ संरेखित होता है। आम तौर पर, यह लिंग पुरुष या महिला के बाइनरी के साथ संरेखित होगा। ट्रांसजेंडर व्यक्ति वह होता है जिसका लिंग जन्म के समय उसे निर्धारित किए गए यौन (सेक्स) से अलग होता है। एक नॉन-बाइनरी व्यक्ति अनन्य रूप से किसी विशिष्ट लिंग के रूप में नहीं पहचाना जाता है।

 

“लिंग पहचान या अभिव्यक्ति” किसी व्यक्ति की वास्तविक या कथित लिंग-संबंधी पहचान, दिखावट, व्यवहार, अभिव्यक्ति, या अन्य लिंग-संबंधी विशेषताओं को संदर्भित करती है, भले ही जन्म के समय उस व्यक्ति को निर्दिष्ट लिंग कुछ भी हो, जिसमें ट्रांसजेंडर होने की स्थिति भी शामिल है, लेकिन इसी तक सीमित नहीं है। किसी व्यक्ति की लिंग-संबंधी पहचान में एक से अधिक लिंग के साथ पहचान किया जाना, या किसी भी लिंग के साथ पहचान न किया जाना शामिल हो सकता है।

 

परिशिष्ट C: ऐसे व्यवहार के उदाहरण जिन्हें प्रतिशोध माना जा सकता है

परिस्थितियों पर निर्भर करते हुए, प्रतिशोध के उदाहरणों में शामिल हो सकते हैं, लेकिन इन्हीं तक सीमित नहीं हैं:

  • इस बारे में पूछताछ करना कि क्या कोई व्यक्ति संरक्षित गतिविधि में लगा हुआ है या नहीं या ऐसा करने वाले किसी व्यक्ति को समाज से बहिष्कृत करना;
  • नौकरी की समाप्ति, स्थानांतरण, और कार्यस्थल में बदलाव, ख़राब प्रदर्शन समीक्षाओं, पदोन्नति या कार्यकाल से इनकार, नौकरी के लाभों से इनकार, पदावनति, निलंबन या नौकरी समाप्ति की धमकियाँ, समायोजन के उचित अनुरोध को इनकार करना, घंटे कम करना, या कम वांछनीय कार्य पारियों/स्थानों के लिए नियुक्ति;
  • शारीरिक हिंसा की धमकी देने जैसी किसी शिकायत की अनुक्रिया में उत्पीड़नकारी व्यवहार में वृद्धि जैसे कि शारीरिक हिंसा की धमकी देना;
  • विश्वविद्यालय या सरकारी अधिकारियों (उदाहरण के लिए, कानून प्रवर्तन, लाइसेंसिंग एजेंसियों) को झूठी रिपोर्ट देना;
  • निर्वासन, आव्रजन अधिकारियों के साथ कार्रवाई शुरू करने की धमकियाँ; या
  • किसी विद्यार्थी के विरुद्ध प्रतिकूल शैक्षणिक कार्रवाइयों में, कम ग्रेड, नकारात्मक अनुशंसा, शैक्षणिक मीटिंगों या सम्मेलनों में विद्यार्थी के बारे में नकारात्मक टिप्पणियाँ या किसी शैक्षणिक अवसर तक पहुँच को सीमित करना शामिल हो सकती हैं।

 

परिशिष्ट D: कर्मचारियों को न्यूयॉर्क राज्य द्वारा अपेक्षित अतिरिक्त सूचनाएँ

न्यूयॉर्क राज्य अपेक्षा करता है कि नियोक्ता कर्मचारियों, आवेदकों, संविदाकारों, और नियोक्ता के साथ व्यापार करने वाले अन्य व्यक्तियों को यौन उत्पीड़न के दावों के संबंध में कानूनी संरक्षणों और बाहरी समाधानों के बारे में जानकारी प्रदान करें। नीचे न्यूयॉर्क राज्य के सभी नियोक्ताओं के लिए अपडेट की गई न्यूयॉर्क राज्य की आदर्श यौन उत्पीड़न नीति से ली गई भाषा शामिल की गई है।

 

यौन उत्पीड़न न केवल रोचेस्टर विश्वविद्यालय द्वारा प्रतिबंधित है, बल्कि यह राज्य, संघीय और, जहाँ लागू हो, वहाँ स्थानीय कानून द्वारा भी प्रतिबंधित है।

 

उपरोक्त नीति में उल्लिखित आंतरिक प्रक्रिया कर्मचारियों के लिए यौन उत्पीड़न की रिपोर्ट करने का एक तरीका है। कर्मचारी और कवर्ड व्यक्ति निम्नलिखित सरकारी संस्थाओं के साथ कानूनी कार्यवाहियों का अनुसरण करना भी चुन सकते हैं। यद्यपि किसी सरकारी एजेंसी के पास शिकायत दायर करने के लिए किसी प्राइवेट अटॉर्नी की आवश्यकता नहीं होती है, किंतु आप किसी अटॉर्नी की कानूनी सलाह भी ले सकते हैं।

 

न्यूयॉर्क राज्य मानवाधिकार प्रभाग

न्यूयॉर्क राज्य मानवाधिकार कानून (HRL), न्यूयॉर्क एग़्जिक्यूटिव लॉ, आर्टि. 15, § 290 एवं अन्य, न्यूयॉर्क राज्य में सभी नियोक्ताओं पर लागू होता है और भले ही आव्रजन स्थिति कोई भी क्यों न हो, यह कर्मचारियों और कवर्ड व्यक्तियों की सुरक्षा करता है। मानवाधिकार कानून के उल्लंघन का आरोप लगाने वाली शिकायत या तो न्यूयॉर्क राज्य मानवाधिकार प्रभाग (DHR) या न्यूयॉर्क राज्य उच्चतम न्यायालत में दायर की जा सकती है।

 

DHR के पास दायर की गई (यौन उत्पीड़न समेत) भेदभाव और उत्पीड़न की शिकायतें कथित गैर-कानूनी भेदभावपूर्ण प्रथा(ओं) के तीन वर्ष के भीतर किसी भी समय प्रस्तुत की जा सकती हैं। अगर कोई व्यक्ति DHR के पास शिकायत दायर नहीं करता है, तो वह कथित गैर-कानूनी भेदभावपूर्ण प्रथा(ओं) के तीन वर्ष के भीतर मानवाधिकार कानून के तहत सीधे राज्य न्यायालय में मुकदमा ला सकता है। अगर कोई व्यक्ति पहले ही राज्य न्यायालय में HRL शिकायत दायर कर चुका है तो वह DHR के पास फाइल नहीं कर सकता है। विश्वविद्यालय में आंतरिक रूप से शिकायत करने से DHR या न्यायालय में दायर करने का आपका समय नहीं बढ़ता है। तीन वर्षों की गणना उत्पीड़न की सबसे हाल की घटना की तारीख से की जाती है। आपको DHR के पास शिकायत दायर करने के लिए किसी अटॉर्नी की आवश्यकता नहीं है, और DHR के पास शिकायत दायर करने की कोई लागत नहीं है।

DHR आपकी शिकायत की जाँच करेगा और यह निर्धारित करेगा कि क्या यह विश्वास करने का संभावित कारण है कि यौन उत्पीड़न हुआ है। संभावित कारण वाले प्रकरणों को प्रशासनिक कानून न्यायाधीश के समक्ष सार्वजनिक सुनवाई प्राप्त होती है। अगर सुनवाई पर यौन उत्पीड़न का होना पाया जाता है, तो DHR के पास राहत देने की शक्ति है। राहत अलग-अलग होती है किंतु इसमें आपके नियोक्ता को उत्पीड़न को रोकने या उत्पीड़न के कारण हुई क्षति की मरम्मत के लिए कार्रवाई करने की आवश्यकता शामिल हो सकती है, जिसमें मौद्रिक क्षतिपूर्ति, दंडात्मक क्षतिपूर्ति, अटॉर्नी की फीस और नागरिक जुर्माने का भुगतान शामिल है।

 

DHR के मुख्य कार्यालय की संपर्क जानकारी है: NYS Division of Human Rights, One Fordham Plaza, Fourth Floor, Bronx, New York 10458। आप (718) 741-8400 पर कॉल कर सकते/सकती हैं या यहाँ जा सकते/सकती हैं: www.dhr.ny.gov

 

DHR के पास शिकायत दायर करने के बारे में अधिक जानकारी के लिए dhr.ny.gov/complaint पर जाएँ। वेबसाइट में एक डिजिटल शिकायत प्रक्रिया है जो शुरू से अंत तक आपके कंप्यूटर या मोबाइल डिवाइस पर पूरी की जा सकती है। वेबसाइट में एक शिकायत फॉर्म है जिसे डाउनलोड किया जा सकता है, भरा जा सकता है और DHR को मेल किया जा सकता है और साथ ही एक फॉर्म भी है जिसे ऑनलाइन प्रस्तुत किया जा सकता है। वेबसाइट में न्यूयॉर्क राज्य भर में DHR के क्षेत्रीय कार्यालयों की संपर्क जानकारी भी शामिल है।

 

यौन उत्पीड़न की शिकायत दायर करने के बारे में अधिक जानकारी के लिए DHR यौन उत्पीड़न हॉटलाइन 1(800) HARASS3 पर कॉल करें।  यह हॉटलाइन आपको यौन उत्पीड़न मामलों में अनुभवी एक स्वयंसेवी अटॉर्नी का रेफ़रल भी प्रदान कर सकती है जो आपको फोन पर सीमित निःशुल्क सहायता और परामर्श प्रदान कर सकता है।

 

प्रजनन स्वास्थ्य संबंधी निर्णयों पर वक्तव्य

न्यूयॉर्क राज्य का कानून किसी कर्मचारी या कर्मचारी पर आश्रित व्यक्ति के प्रजनन स्वास्थ्य संबंधी निर्णय लेने के आधार पर रोज़गार में भेदभाव और प्रतिशोध की कार्रवाई को प्रतिबंधित करता है, जिसमें किसी विशेष औषधि, डिवाइस या चिकित्सा सेवा का उपयोग करने या उस तक पहुँच प्राप्त करने का निर्णय भी शामिल है (जिसे इसमें आगे “प्रजनन स्वास्थ्य संबंधी निर्णय” कहा गया है), लेकिन यह इन्हीं तक सीमित नहीं है।

 

किसी नियोक्ता के लिए कर्मचारी की पूर्व सूचित सकारात्मक लिखित सहमति के बिना किसी कर्मचारी के या उसके आश्रित के प्रजनन स्वास्थ्य संबंधी निर्णयों से संबंधित व्यक्तिगत जानकारी तक पहुँच प्राप्त करना, या किसी कर्मचारी से कोई ऐसे अधित्याग या अन्य दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर कराना जिसका आशय कर्मचारी को अपने प्रजनन स्वास्थ्य संबंधी निर्णय स्वयं लेने के अधिकार से वंचित करना हो, एक गैर-कानूनी रोज़गार प्रथा है।

 

कोई भी कर्मचारी जिसे लगता हो कि इस नीति का उल्लंघन हुआ है उसे अपनी चिंता PADH@rochester.edu पर रिपोर्ट करनी चाहिए। कोई भी कर्मचारी जिसे लगता हो कि इस नीति का उल्लंघन हुआ है उसे अपनी चिंता PADH@rochester.edu पर रिपोर्ट करनी चाहिए। विश्वविद्यालय ऐसी रिपोर्टों की जाँच करेगा और उचित सुधारात्मक कदम उठाएगा। इस नीति के तहत अधिकारों का प्रयोग करने वाले कर्मचारियों के विरुद्ध भेदभाव और प्रतिशोध प्रतिबंधित है।

 

संयुक्त राज्य समान रोज़गार अवसर आयोग

संयुक्त राज्य समान रोज़गार अवसर कमिशन (EEOC) संघीय भेदभाव-विरोधी कानूनों का प्रवर्तन करता है, जिसमें 1964 संघीय नागरिक अधिकार अधिनियम, 42 U.S.C. § 2000e एवं अन्य का टाइटल VI शामिल है। व्यक्ति उत्पीड़न की सबसे हाल की घटना के 300 दिनों के भीतर किसी भी समय EEOC के पास शिकायत दायर कर सकता है। EEOC के पास शिकायत दायर करने की कोई लागत नहीं है। EEOC शिकायत की जाँच करेगी और यह निर्धारित करेगा कि क्या यह मानने का उचित कारण है कि भेदभाव हुआ है। अगर EEOC निर्धारित करता है कि हो सकता है कि कानून का उल्लंघन किया गया है, तो EEOC नियोक्ता के साथ स्वैच्छिक समझौते तक पहुँचने का प्रयास करेगा। अगर EEOC किसी समझौते पर नहीं पहुँच पाता है, तो EEOC (या कुछ प्रकरणों में न्याय विभाग) तय करेगा कि मुकदमा दायर किया जाए या नहीं। अगर EEOC आरोप बंद कर देता है, यह निर्धारित करने में असमर्थ है कि संघीय रोज़गार भेदभाव कानूनों का उल्लंघन किया गया हो सकता है, या यह विश्वास करता है कि गैरकानूनी भेदभाव हुआ किंतु कोई मुकदमा दायर नहीं करता है, तो EEOC श्रमिकों को संघीय अदालत में मुकदमा दायर करने की अनुमति देते हुए मुकदमा करने के अधिकार का नोटिस (Notice of Right to Sue) जारी करेगा।

 

व्यक्ति मध्यस्थता, निपटान या सुलह में राहत प्राप्त कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, अगर भेदभाव हुआ पाया जाता है तो संघीय न्यायालय उपयुक्त कानूनी राहत प्रदान कर सकते हैं। सामान्य तौर पर, EEOC के अधिकार क्षेत्र में आने के लिए निजी नियोक्ताओं के पास कम से कम 15 कर्मचारी अवश्य होने चाहिए।

 

काम पर भेदभाव का आरोप लगाने वाला कोई कर्मचारी “भेदभाव का आरोप” दायर कर सकता है। EEOC के ज़िला, क्षेत्र और फील्ड कार्यालय हैं जहाँ शिकायतें दायर की जा सकती हैं। 1-800-669-4000 (TTY: 1-800-669-6820) पर कॉल करके, www.eeoc.gov पर वेबसाइट पर जाकर या info@eeoc.gov पर ईमेल के जरिए EEOC से संपर्क करें।

 

अगर किसी व्यक्ति ने न्यूयॉर्क राज्य मानवाधिकार प्रभाग के पास कोई प्रशासनिक शिकायत दायर की है, तो DHR संघीय न्यायालय में आगे बढ़ने के अधिकार को सुरक्षित रखने के लिए स्वतः EEOC के पास शिकायत दायर करेगा।

 

स्थानीय संरक्षण

कई इलाकों में व्यक्तियों को यौन उत्पीड़न और भेदभाव से संरक्षित वाले कानूनों का प्रवर्तन किया जाता है। यह पता लगाने के लिए कि क्या ऐसा कोई कानून मौजूद है व्यक्ति को उस काउंटी, शहर या कस्बे से संपर्क करना चाहिए जिसमें वह रहता है। उदाहरण के लिए, ऐसे कर्मचारी जो न्यूयॉर्क शहर में काम करते हैं वे न्यूयॉर्क सिटी कमीशन ऑन ह्यूमन राइट्स के पास यौन उत्पीड़न या भेदभाव की शिकायत दायर कर सकते हैं। Law Enforcement Bureau of the NYC Commission on Human Rights, 22 Reade Street, 1st Floor, New York, New York, न्यूयॉर्क में उनके मुख्य कार्यालय से संपर्क करें; 311 या (212) 306-7450 पर कॉल करें; या www.nyc.gov/html/cchr/html/home/home.shtml पर जाएँ।

 

स्थानीय पुलिस विभाग से संपर्क करें

अगर उत्पीड़न में अवांछित शारीरिक स्पर्श, ज़बरदस्ती शारीरिक कारावास, या ज़बरदस्ती यौन कृत्य शामिल है, तो यह आचरण अपराध का गठन कर सकता है। आपराधिक आरोपों का अनुसरण करने के इच्छुक लोगों को विश्वविद्यालय के सार्वजनिक सुरक्षा विभाग या उनके स्थानीय पुलिस विभाग से संपर्क करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

 

इस नीति के बारे में

नीति संख्या

106

 

निर्गमन प्राधिकारी

रोचेस्टर विश्वविद्यालय

 

उत्तरदायी अधिकारी

जूलिया ग्रीन (Julia Green)

 

संपर्क जानकारी

julia.green@rochester.edu

अतिरिक्त संसाधन

PADH रिपोर्ट फॉर्म (https://rochester-gme-advocate.symplicity.com/public_report/index.php/ pid818927?rep_type=1002)

टाइटल IX नीति
https://www.rochester.edu/policies/wp-content/uploads/2024/09/Title-IX-Policy.pdf

विद्यार्थी यौन कदाचार नीति https://www.rochester.edu/sexualmisconduct/assets/pdf/StudentSexualMisconductPolicy.pdf

विद्यार्थी आचरण के मानक https://www.rochester.edu/college/cscm/assets/pdf/standards-of-student-conduct.pdf

 

संबंधित नीतियाँ

 

  • #102 रोज़गार में भेदभाव निषेध

(https://www.rochester.edu/policies/policy/non-discrimination-in-employment-policy/)

 

[1]           विद्यार्थी आचरण के मानक और संबंधित प्रक्रियाएँ उन रिपोर्टों पर लागू होती हैं जिनमें आरोप लगाया जाता है कि कोई विद्यार्थी संरक्षित श्रेणी के आधार पर भेदभाव और/या उत्पीड़न करने में लिप्त हुआ है।

[2]           न्यूयॉर्क मानवाधिकार कानून का अनुभाग 296 लैंगिक पहचानों की एक विस्तृत-श्रेणी को मान्यता देता है और न्यूयॉर्क राज्य के कर्मचारियों और शैक्षणिक संस्थानों से अपेक्षा करता है कि वे लैंगिक पहचान या अभिव्यक्ति के आधार पर भेदभाव और उत्पीड़न को प्रतिबंधित करें और उस पर कार्रवाई करें।

[3]           जब प्रतिवादी OEE या HR में काम करता है, तो OEE और/या HR के भीतर किसी उपयुक्त प्रशिक्षित व्यक्ति और बिना किसी हित के टकराव वाले व्यक्ति का सेवा करने के लिए चयन किया जाएगा, या OEE या HR के प्रतिनिधि के बजाय पैनल पर सेवा करने के लिए स्टाफ़ के किसी अन्य प्रशिक्षित सदस्य को चुना जाएगा।  पैनल में नियुक्त कोई OEE या HR का कोई प्रतिनिधि, अगर निष्पक्ष रूप से काम करने में असमर्थ हो, तो वह स्वयं को पैनल की कार्यवाही से अलग कर सकता है।

[4]           जैसा कि फुटनोट 1 में बताया गया है, न्यूयॉर्क राज्य का कानून लिंग की पहचान, लिंग अभिव्यक्ति, और ट्रांसजेंडर होने की स्थिति को संरक्षित श्रेणियों के रूप में परिभाषित करता है।

[5]           फुटनोट 1 और 4 देखें।

[6]           इस नीति में प्रयुक्त, “अपरिहार्य परिस्थितियाँ” वाक्यांश का मतलब ऐसे मामलों को भी शामिल करते हुए समझा जाएगा जिनमें चिकित्सीय और अन्य तरह के अवकाश, छुट्टियाँ, और ऐसी कोई भी अन्य परिस्थिति शामिल है जिसके परिणामस्वरूप कोई पक्षकार विस्तारित अवधि तक शैक्षणिक परिवेश या कार्यस्थल से अनुपस्थित रहता है।

[7]           इस नीति में प्रयुक्त, “अपरिहार्य परिस्थितियाँ” वाक्यांश का मतलब ऐसे मामलों को भी शामिल करते हुए समझा जाएगा जिनमें चिकित्सीय और अन्य तरह के अवकाश, छुट्टियाँ, और ऐसी कोई भी अन्य परिस्थिति शामिल है जिसके परिणामस्वरूप कोई पक्षकार विस्तारित अवधि तक शैक्षणिक परिवेश या कार्यस्थल से अनुपस्थित रहता है।

[8]           अगर किसी पक्ष में कोई संकाय सदस्य शामिल है, तो यह सुनिश्चित करने के लिए पाँच सदस्य वाला निर्णय पैनल का गठन किया जाएगा कि उसमें कम-से-कम एक ऐसा संकाय सदस्य हो, जिसके पास कोई प्रशासनिक नियुक्ति न हो।

[9]           जैसा कि विश्वविद्यालय की आचरण संहिता में प्रावधान दिया गया है, लेखा-परीक्षण समिति के पास विश्वविद्यालय के अधिकारियों और न्यासियों के बारे में रिपोर्टों की जाँच करने और उनका जवाब देने की प्रक्रिया निर्धारित करने का विवेकाधिकार है।  लेखा-परीक्षण समिति यह निर्देश दे सकती है कि कोई जाँच और निर्णय लेने की प्रक्रिया इस नीति के अनुसार आगे बढ़े या यह निर्धारित कर सकती है कि कोई वैकल्पिक प्रक्रिया अपनाना उपयुक्त होगा।

[10]         संकाय के सदस्य के बारे में अनुशासनात्मक कार्यवाही, निर्धारण पैनल द्वारा अधिरोपित किए जाने के बजाय फैकल्टी हैंडबुक में निर्धारित प्रक्रिया के जरिए विचार किए जाने के लिए सिफारिशें शामिल होती हैं।

[11]         जब यह परिणाम उचित ठहराया जाता है, तो फैकल्टी हैंडबुक में बताई गई कार्यकाल के निरस्तीकरण प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

[12]         इस नीति में प्रयुक्त, “अपरिहार्य परिस्थितियाँ” वाक्यांश का मतलब ऐसे मामलों को भी शामिल करते हुए समझा जाएगा जिनमें चिकित्सीय और अन्य तरह के अवकाश, छुट्टियाँ, और ऐसी कोई भी अन्य परिस्थिति शामिल है जिसके परिणामस्वरूप कोई पक्षकार विस्तारित अवधि तक शैक्षणिक परिवेश या कार्यस्थल से अनुपस्थित रहता है।

[13]         जैसा कि इस नीति में कहीं अन्यत्र बताया गया है, न्यूयॉर्क मानवाधिकार कानून की धारा 296 लिंग पहचान की विस्तृत श्रेणी को मान्यता देती है और न्यूयॉर्क राज्य के नियोक्ताओं और शैक्षणिक संस्थानों के लिए यह आवश्यक बनाती है कि वे लिंग पहचान या अभिव्यक्ति के आधार पर भेदभाव और उत्पीड़न को प्रतिबंधित करें और उन पर अनुक्रिया करें।